ये बाबा हैं ज्वैलरी की चलती-फिरती दुकान, पहनते हैं करोड़ों के आभूषण

नई दिल्ली(11 मार्च): सुधीर मक्कड़ बिट्टू उर्फ गोल्डन पुरी बाबा जैसा कि नाम से आप जान गए होंगे। इनका शरीर गहनों से ही सजा रहता है। अगर इनको गहनों की चलती-फिरती दुकान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हर समय शरीर पर करीब 3 करोड़ के गहनें रखने वाले गोल्डन पुरी जहां भी जाते हैं, लोगों की भीड़ उनके गहनों को टकटकी लगाए देखती रहती है।    गोल्डन पुरी बाबा के मुताबिक उनका जन्म गांधीनगर दिल्ली में जीवनदास मक्कड़ के साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने गुरुकुल महाविद्यालय में मात्र 8वीं तक पढ़ाई की है। 1987 में बिट्टू उर्फ गोल्डन पुरी ने शादी के बाद आजीविका चलाने के लिए हरिद्वार के घाट पर माला बेचने से लेकर पीठों में कपड़े बेचे। कुछ वर्षों के बाद वह पुन: दिल्ली आ गए और वहां बिट्टू गारमैंट नाम से रैडीमेड कपड़ों का व्यवसाय शुरू किया। उनका बिजनैस खूब प्रफुल्लित हुआ और कारोबार की वाॢषक टर्न ओवर 150 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इस दौरान भी वह साधु समाज की संगत में रहे। 

2012 में वह हरिद्वार कुम्भ स्नान करने गए जहां उन्हें जूना अखाड़े के महंत मछेन्द्र पुरी ने संन्यासी विधि-विधान से भगवा चोला पहना दिया, जिससे उनके जीवन में एकाएक ठहराव आ गया। वह पल में बिट्टू मक्कड़ से बाबा गोल्डन पुरी हो गए और उन्हें रथ पर बिठाकर शाही स्नान साधु रीति-रिवाज से करवाया गया। 

संन्यास धारण करने के बावजूद करोड़ों रुपए के सोने को पहनने के शौक के बारे में गोल्डन बाबा ने बताया कि वह रोजाना अपने तन पर पहने सारे गहनों को उतार कर सोते हैं और सुबह उन गहनों व लक्ष्मी माता की पूजा-अर्चना करने के उपरांत उन्हें पुन: धारण करते हैं। उन्होंने बताया कि धर्म प्रचार के लिए उन्हें देश भर में भ्रमण करना पड़ता है और करोड़ों के गहनों के कारण उन्हें उत्तराखंड़ सरकार ने सुरक्षा भी प्रदान कर रखी है इसके अतिरिक्त उनके साथ प्राइवेट बाऊंसर भी होते हैं।    गोल्डन बाबा ने बताया कि करोड़ों के गहने उनकी अपनी कमाई से बने हैं वह किसी भक्त से दान स्वरूप दक्षिणा स्वीकार नहीं करते हैं बल्कि अपने व्यवसाय से हुई कमाई को वह धार्मिक कार्यों और जरूरतमंदों की मदद के लिए खर्च करते हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ में हुए विनाश के दौरान वह हवाई मार्ग से 2 ट्रक राहत सामग्री जरूरतमंदों में वितरित करने जा रहे थे कि हैलीपैड पर एक न्यूज चैनल के एंकर ने उनके गहनों को देखकर सवाल किया कि क्या आप इस प्राकृतिक विनाश के पीड़ितों के पुनर्वास की खातिर पहना हुआ सोना दान दे सकते हैं। 

बाबा ने बताया कि उन्होंने तुरंत अपने पहने सोने का वजन करवाया और तोल के मुताबिक बनती रकम राहत कार्यों के लिए दान में दे दी। आज के दौर में गोल्डन पुरी उन संन्यासियों में शुमार होते जा रहे हैं जिनकी ख्याति दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और आज गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली सहित देश-विदेश में उनके अनेकों फॉलोअर हैं।