'मैदान पर मैं बहुत निर्दयी हो जाता हूं'

नई दिल्ली (11 सितंबर): जब मैं मैदान पर होता हूं और बॉल मेरे हाथ में होती है तो मैं बल्लेबाज के लिए सबसे निर्दयी साबित होता हूं। उसको आउट करना मेरा ध्येय होता है। उस समय मुझे मेरा करियर दिखाई देता है। अक्सर मैं बहुत कम रिएक्शन देता हूं, भाव शून्य सा रहता हूं, लेकिन जब बॉल मेरे हाथ में होती है तो मेरे चेहरे पर कुटिल मुस्कान होती है। ठीक वैसे ही जब  मेरे हाथ में बल्ला होता है तो मैं गेंदबाज की छोटी सी भी गल्ती का भरपूर फायदा उठाता हूं। हां, खेलते वक्त जो भी भाव आते हैं वो नेचुरल होते हैं।