इतिहास रचेगा ISRO- 104 सैटेलाइट से साथ अंतरिक्ष में भारत की 'तीसरी आंख' पाकिस्तान पर रहेगी नज़र!

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (14 फरवरी): ISRO अंतरिक्ष में लगाने जा रहा है अब तक की सबसे बड़ी छलांग... छलांग जो अंतरिक्ष अनुसंधान में इतिहास रच देगी... छलांग जो भारत को अरबों डॉलर के स्पेस लॉन्च मार्केट यानी प्रक्षेपण बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना देगी... जी हां, भारत की स्पेस एजेंसी ISRO बुधवार को अतंरिक्ष प्रक्षेपण बाजार में बड़ा कदम रखने जा रहा है... एक साथ एक बार में 104 सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे... अब तक ये रिकॉर्ड रूस की स्पेस एजेंसी RSA के नाम था जिसने 2014 में एक बार में 37 सैटेलाइट लॉन्च किए थे... वैसे अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा भी एक साथ 29 सैटेलाइट लॉन्च कर चुकी है... ISRO का जून 2016 में रिकॉर्ड 20 सैटेलाइट एक साथ लॉन्च किए थे... कल के लॉन्च की खास बात ये है कि इसमें भारत के सिर्फ तीन सैटेलाइट हैं बाकि 101 सैटेलाइट विदेशी हैं... आइए जानते हैं कल के लॉन्च से जुड़ी खास बातें-

    *इंडियन स्‍पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO)कल एक नया इतिहास रचने जा रहा है।

    *अंतरिक्ष इतिहास में एक साथ एक बार में 104 सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे।

    *PSLV-C37 सीरीज के सैटेलाइट मिशन को 15 फरवरी सुबह 9.28 पर प्रक्षेपित किया जाएगा।

    *मिशन की उल्टी गिनती मंगलवार सुबह 5.28 बजे से शुरू हो चुकी है।

    *104 सैटेलाइटों में से सिर्फ तीन भारतीय सैटेलाइट हैं बाकि सब विदेशी नैनों सैटेलाइट हैं।

    *इनमें इजरायल, कजाखिस्तान, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, यूएई के एक-एक सैटेलाइट हैं।

    *इसके अलावा 96 सैटेलाइट अकेले अमेरिका के हैं, इन 103 सैटेलाइट का कुल वजन 664kg है।

    *PSLV-C37 मिशन में मुख्य सैटेलाइट 714 किलोग्राम वजन वाला Cartosat-2 सीरीज उपग्रह है।

स्पेस लॉन्च मार्केट में छा गया भारत...

    *पिछले 10 सालों में ISRO में 38 फीसदी सैटेलाइट अपने लॉन्च किए, बाकि विदेश थे।

    *1975 से अब तक 84 लॉन्च में 146 सैटेलाइट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किए हैं।

    *इसमें से 79 विदेश सैटेलाइट थे, 24% यूएस, 15% कनाडा, 11% सिंगापुर और जर्मनी के थे।

    *विदेशी सैटेलाइट्स लॉन्च करने में ISRO स्पेशियालिटी हासिल कर चुका है।

    *2016 में ISRO ने एक साथ 20 सैटेलाइट लांच किए थे, 2016 में कुल 50 लॉन्च किए थे।

    *साथ ही दोबारा प्रयोग में आने वाले प्रक्षेपण यान RLV और स्क्रैमजेट इंजन का सफल प्रयोग किया।

    *स्वदेश निर्मित GSLV श्रृंखला के 2 से 2.5 टन क्षमता वाले रॉकेट वैश्विक बाजार को पेश किया।

    *इसके अलावा PSLV में खुद विकसित किए मल्टीपल बर्न तकनीक का वाणिज्यिक इस्तेमाल किया।

    *ISRO की कमर्शियल इकाई, एंट्रिक्स कॉरपोरेशन को लगातार फायदा हो रहा है।

    *कुल 500 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल किए जबकि इतने पर ही बातचीत जारी है।

    *2015 के आंकड़ों के मुताबिक ISRO ने पिछले पांच सालों में 896 करोड़ की कमाई की थी।

    *2010-11 में मुनाफा 138 करोड़ था जो 2014-15 में बढ़कर 205 करोड़ हो गया।

Cartosat सैटेलाइट-  भारत की तीसरी आंख, पाकिस्तान पर रहेगी नजर...

    *Cartosat सैटेलाइट ISRO के अपना बनाया सैटेलाइट है।

    *जिसका मकसद धरती की हाई रेज्योल्यूशन इमेज तैयार करना है।

    *Cartosat सैटेलाइट में उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे लगे हैं।

    *जो अंतरिक्ष से 0.65 मीटर तक की फोटो लेने की क्षमता रखते हैं।

    *जमीन पर होनेवाले किसी भी गतिविधि की बारीकी से पहचान करता है।

    *विशेषज्ञों ने Cartosat 2सी को 'आकाश में भारत की आंख' का नाम दिया है।

    *इस उपग्रह से भारतीय सेना का निगरानी तंत्र और मजबूत हो गया है।

    *PoK में सेना के सर्जिकल स्ट्राइक में इस सैटेलाइट का इस्तेमाल किया गया था।

    *भारतीय सेना को  हाई रेज्योल्यूशन सैटेलाइट इमेज Cartosat ने ही दी थी।

    *अतंरिक्ष में भारत के पांच Cartosat सैटेलाइट काम कर रहे हैं।

    *पहला Cartosat-1 श्रीहरिकोटा से 5 मई 2005 में छोड़ा गया था।

    *इसके बाद 2007 में एक, 2008 में दो और 2014 में एक और सैटेलाइट छोड़ा गया।

    *सारे सैटेलाइट पीएसएलवी सी सीरिज द्वारा लॉन्च किए गए थे।

 

क्या होता है प्रक्षेपण यान

    *उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने वाले विशाल रॉकेट को प्रक्षेपण यान कहा जाता है।

    *प्रक्षेपण यान तीन या चार चरण में धरती से अतंरिक्ष की ओर रूख करते हैं।

    *पृथ्वी से निकलने के बाद यान एक सैटेलाइट को 10 से 30min में स्थापित कर देता है।

    *भारत में प्रक्षेपण यानों के विकास कार्यक्रम की शुरुआत 1970 के दशक के प्रारंभ में हुई।

    *प्रथम प्रायोगिक प्रक्षेपण यान SLV-3 1980 में विकसित किया गया।

    *इसका नए संस्करण ASLV का प्रक्षेपण 1992 में सफलतापूर्वक किया गया।

    *भारत ने सैटेलाइट प्रक्षेपण यान में धिरे-धिरे खुद विकास किया।

    *PSLV और GSLV इसका बेहतरीन उद्हारण हैं।

    *भारत का स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन बनाने में सफलता प्राप्त की।

    *क्रायोजेनिक इंजन वाले राकेट सैटेलाइट को अंतरिक्ष में 36000 किमी तक ले जा सकते हैं।

क्या हैं PSLV और GSLV

    *पीएसएलवी (Polar Satellite Launch Vehicle) इसरो का पहला ऑपरेशनल प्रक्षेपण यान है।

    *पीएसएलवी 1600kg के सैटेलाइट को ध्रुवीय कक्षा में 620km पर स्थापित कर सकता है।

    *1050 किलोग्राम भार के उपग्रहों को अंतरण कक्षा में प्रक्षेपित करने में सक्षम है।

    *सितम्बर 2012 तक पीएसएलवी की 21 निरंतर सफल उड़ानें रहीं।

    *जीएसएलवी Geosynchronous Satellite Launch Vehicle पीएसएलवी से बेहतर है।

    *यह तीन श्रेणी वाला प्रक्षेपण यान है जिसमें सॉलिड, लिक्विड और तीसरा क्रायोजेनिक इंजन होता है।

    *पहले और दूसरे चरण में पीएसएलवी में इस्तेमाल होने वाली तकनीक ही ली गई है।

    *तीसरे चरण के लिए इसरो ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित क्रायोजेनिक इंजन का आविष्कार किया है।

    *इससे पहले तीसरे चरण के लिए ISRO रूस निर्मित क्रायोजेनिक इंजन का प्रयोग कर रहा था।

अंतरिक्ष में भारत की शानदार उपलब्धियां...

26 सितम्बर 2016: PSLV का सबसे लंबा मिशन सफलतापूर्वक आठ सैटेलाइट स्थापित।

9 सितम्बर 2016: जीएसएलवी ने पहला उपग्रह इनसैट-3डीआर सफलतापूर्वक किया स्‍थापित।

22 जून 2016: PSLV ने एक साथ 20 सैटेलाइट को किया कक्षा में स्थापित।

28 अप्रैल 2016: नेविगेशन सैटेलाइट आईआरएनएसएस- 1जी सफलतापूर्वक लॉन्च।

10 मार्च 2016: पीएसएलवी सी32 इसरो के छठे नेवीगेशन सैटेलाइट का श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण।

20 जनवरी 2016: पीएसएलवी सी31 5वें नेविगेशन सैटेलाइट का लॉन्च सफल।

16 दिसम्बर 2015: सिंगापुर के छह उपग्रहों के साथ भारत के पीएसएलवी-सी 29 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण।

28 सितम्बर 2015: पीएसएलवी सी-30 एस्ट्रोसैट सैटेलाइट लॉन्च हुआ।

11 जुलाई 2015: पीएसएलवी-सी28 सबसे वजनी व्यावसायिक स्पेस मिशन, पांच ब्रिटिश सैटेलाइट कक्षा में स्थापित।

18 दिसम्बर 2014: जीएसएलवी मार्क 3 और इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले यान का सफल परीक्षण।

30 जून 2014: पीएसएलवी-सी 23 रॉकेट से पांच उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण।

5 जनवरी 2014: श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ सबसे बड़ा रॉकेट जीएसएलवी-डी5।

9 सितंबर, 2012: पीएसएलवी-सी21 ने स्पॉट-6 एवं प्रोइटेरस का प्रक्षेपण किया।

26 अप्रैल, 2012: पीएसएलवी-सी19 ने रिसैट-1 का प्रक्षेपण किया।

12 अक्टूबर, 2011: पीएसएलवी-सी18 ने मेघा-ट्रॉपिक्स, जुगुनू, एसआरएमसैट और वेसेलसैट-1 का प्रक्षेपण किया।

15 जुलाई, 2011: पीएसएलवी-सी17 ने जीसैट-12 का प्रक्षेपण किया।

20 अप्रैल, 2011: पीएसएलवी-सी16 ने रिसोर्ससैट-2, यूथसैट तथा एक्स-सैट का प्रक्षेपण किया।

12 जुलाई, 2010: पीएसएलवी-सी15 ने कार्टोसैट-2बी, एलसैट-2ए, एनएलएस 6.1 तथा 6.2 और स्टुडसैट प्रक्षेपितत किए।

23 सितंबर, 2009: पीएसएलवी-सी14 ने ओशनसैट-2 और छह नानो उपग्रह प्रक्षेपित किए।

20 अप्रैल, 2009: पीएसएलवी-सी12 ने रिसैट-2 और अनुसैट प्रक्षेपित किए।

22 अक्टूबर, 2008: पीएसएलवी-सी11 ने चंद्रायन-1 प्रक्षेपित किया।

28 अप्रैल, 2008: पीएसएलवी-सी9 ने कार्टोसैट-2ए, आईएमएस-1 तथा आठ नानो-उपग्रह प्रक्षेपित किये।

23 जनवरी, 2008: पीएसएलवी-सी10 ने टेकसार प्रक्षेपित किया।

23 अप्रैल, 2007: पीएसएलवी-सी8 ने एजाइल प्रक्षेपितत किया।

10 जनवरी, 2007: पीएसएलवी-सी7 ने कार्टोसैट-2, एसआरई-1, लापान-टबसैट और पिहुएनसैट-1 प्रक्षेपित किए।

5 मई, 2005: पीएसएलवी-सी6 ने कार्टोसैट-1 तथा हैमसैट प्रक्षेपित किए।

17 अक्तूबर, 2003: पीएसएलवी-सी5 ने रिसोर्ससैट-1 (आईआरएस-पी6) प्रक्षेपित किया।

12 सितंबर, 2002: पीएसएलवी-सी4 ने कल्पना-1 (मेटसैट) प्रक्षेपित किया।

22 अक्टूबर, 2001: पीएसएलवी-सी3 ने टीईएस प्रक्षेपित किया।

26 मई, 1999: पीएसएलवी-सी2 ने ओशनसैट (आईआरएस-पी4), किटसैट-3 और डीएलआर-टबसैट को प्रक्षेपित किया।

29 सितंबर, 1997: पीएसएलवी-सी1 ने आईआरएस-1डी प्रक्षेपित किया।

21 मार्च, 1996: पीएसएलवी-डी3 ने आईआरएस-पी3 प्रक्षेपित किया।

15 अक्तूबर, 1994: पीएसएलवी-डी2 ने आईआरएस-पी2 प्रक्षेपित किया।

20, सितंबर, 1993: पीएसएलवी-डी1 ने आईआरएस-1ई प्रक्षेपित किया, लेकिन यह प्रक्षेपण सफल नहीं हो पाया।