अमेरिका, चीन और यूरोप की तुलना में 66 गुना सस्ता है इसरो

नई दिल्ली (15 फरवरी): इसरो ने एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। खास बात ये कि इसमें से भारत का सिर्फ 3 सैटेलाइट हैं। जबकि बाक़ी के 101 सैटेलाइट्स इसराइल, कज़ाख़्स्तान, नीदरलैंड, स्विटज़रलैंड और अमरीका के हैं।

दरअसल पिछले कुछ सालों में भारत अंतरिक्ष प्रक्षेपण के बाज़ार में भरोसेमंद प्लेयर बनकर उभरा है। बीते कुछ सालों में भारत ने दुनिया के 21 देशों के 79 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है, जिसमें गूगल और एयरबस जैसी बड़ी कंपनियों के सैटेलाइट शामिल रहे हैं।

एक साथ ही 104 सैटेलाइट्स को भेजने के बाद इस बाज़ार में भारत की जगह और मज़बूत हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह तो यही है कि अमरीका की तुलना में भारत से किसी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने का खर्चा करीब 60-65 फ़ीसदी कम होता है, मोटे तौर पर महज एक तिहाई खर्च में भारत किसी का सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज सकता है।

देशरॉकेटलागत (रुपए में)
भारतPSLV100 करोड़
रूसप्रोटोन 455 करोड़
अमेरिकाफॉल्कन-9 381 करोड़
जापान  एच-2ए6692 करोड़
चीन  लॉन्ग मार्च6692 करोड़
यूरोप       एरियन-5  6692 करोड़
अमेरिकाएटलस-56692 करोड़

भारत में उपलब्ध सस्ता श्रम के अलावा कम लागत की वजह इसरो का सरकारी तंत्र होना भी है। हालांकि भारत को इस सस्ते बाज़ार में भी चीन से होड़ लेनी पड़ रही है, क्योंकि चीन भी सस्ते दर पर अंतरिक्ष में उपग्रहों को भेजने के लिए बड़ा बाज़ार है।