कभी साइकिल पर सैटेलाइट ले जाने वाले इसरो ने 5 सालों में कमाए 900 करोड़

नई दिल्ली (14 फरवरी): 15 फरवरी को प्रक्षेपित किए जाने वाले 104 उपग्रहों में से सिर्फ तीन भारत के हैं, लेकिन बाकी उपग्रहों की कुल लागत का आधा हिस्सा इसरो को उनके प्रक्षेपण से मिलेगा। हालांकि इसरो ने अभी इस बात का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है कि इसरो को इन सैटेलाइट के लांच से ठीक ठीक कितनी रकम मिलने वाली है।

कम खर्च पर पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल यानी पीएसएलवी से विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक अतरिक्ष में स्थापित करने के चलते इसरो 20 देशों की पहली पसंद बना हुआ है।

- इसरो में पिछले 5 सालों में 896 करोड़ कमाए।

- 2010-11 में इसरो का मुनाफा 138 करोड़ था जो 2014-15 में बढ़कर 205 करोड़ हो गया।

- 2013-15 के बीच इसरो ने 13 देशों के 28 विदेशी उपग्रह भेजकर 10.01 करोड़ डॉलर कमाए थे।

- अगस्त, 2016 में इसरो को 68 और विदेशी उपग्रह लांच कराने का ठेका मिला।

- 22 जून को पीएसएलवी सी 34 के जरिये 17 विदेशी और तीन स्वदेशी उपग्रह भेजे गए।

- पिछले 10 सालों में इसरो ने 38 फीसदी अपने सैटेलाइट लांच किए हैं। बाकी सब विदेशी सैटेलाइट किराया लेकर लांच कराए।

इसरो की कमर्शियल इकाई एंट्रिक्स कॉरपोरेशन एंट्रिक्स कॉरपोरेशन अब तक 500 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल कर चुकी है और करीब इतने पर ही बातचीत आखिरी दौर में है। ग्लोबल सैटेलाइट मार्केट में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है। अभी यह इंडस्ट्री 13 लाख करोड़ रुपए की है। इसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 41 फीसदी की है, जबकि अभी तक भारत की हिस्सेदारी 4 फीसदी से भी कम है, लेकिन दुनिया की बाकी सैटेलाइट लॉन्चिंग एजेंसियों के मुकाबले इसरो की लॉन्चिंग 10 गुना सस्ती है।