ISRO की एक और उड़ान, लॉन्च किया नेवीगेशन सैटेलाइट


श्रीहरिकोटा (31 अगस्त): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO एकबार फिर अंतरीक्ष में कामयाबी का उड़ान भरने जा रहा है।  ISRO ने श्रीहरिकोटा से नौवहन सैटेलाइट आईआरएनएसएस 1एच का प्रक्षेपण कर दिया है। भारतीय क्षेत्रीय नौवहन सैटेलाइट प्रणाली यानी IRNSS के हिस्से, 1,425 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट को ध्रुवीय सैटेलाइट प्रक्षेपण यान PSLV का रॉकेट एक्सएल अंतरिक्ष में लॉन्च किया है।

प्रक्षेपण वाहन PSLV सी39 इस सैटेलाइट के प्रक्षेपण के लिए पीएसएलवी के एक्सएल प्रकार का उपयोग करेगा, जिसमें छह स्ट्रैप ऑन्स लगे हैं। प्रत्येक स्ट्रैप ऑन अपने साथ 12 टन प्रणोदक ले जा रहा है। कुल 44.4 मीटर लंबे PSLV सी39 की यह 41वीं उड़ान है। इसका प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्पेस पोर्ट के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा। इसरो ने छह छोटे और मध्यम उद्योगों के एक समूह के साथ मिल कर इस सैटेलाइट का निर्माण और परीक्षण किया है।


तारामंडल में मौजूद सात सैटेलाइटों में से एक IRNSS 1A के लिए IRNSS 1S की भूमिका एक बैकअप नौवहन की होगी क्योंकि इसकी तीन रीबिडियम परमाणु घड़ियों ने काम करना बंद कर दिया है। इंडियन रीजनल नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम आईआरएनएसएस एक स्वतंत्र क्षेत्रीय प्रणाली है जिसका विकास भारत ने अमेरिका के जीपीएस, रूस के ग्लोनास और यूरोप द्वारा विकसित गैलीलियो के मुताबिक किया है।


यह प्रणाली भूभागीय एवं समुद्री नौवहन, आपदा प्रबंधन, वाहनों पर नजर रखने, बेड़ा प्रबंधन, हाइकरों और घुमंतुओं के लिए नौवहन सहायता और चालकों के लिए दृश्य एवं श्रव्य नौवहन जैसी सेवाओं की पेशकश करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका नाम नाविक एनएवीआईसी (नेवीगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) रखा था।