अंतरिक्ष में होगी हिंदुस्तान की 'स्पेसगीरी', लॉन्च हुआ इनसेट-3DR

नई दिल्ली (8 सितंबर): अंतरिक्ष में हिंदुस्तान आज एक और बड़ी छलांग लगाने लगाई। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारत ने अत्याधुनिक सैटेलाइट इनसेट-3DR का सफल लॉन्च किया।

इस लॉन्चिंग को पहली बार GSLV-F5 के ज़रिए सैटेलाइट को लॉन्च किया गया। इसमें पहली बार क्रायोजेनिक अपर स्टेज इंजन का इस्तेमाल किया गया।

इस अत्याधुनिक सैटेलाइट के साथ ही उस अपर स्टेज क्रायोजेनिक इंजन की भी खूब चर्चा हो रही है, जिसका इस्तेमाल पहली बार लॉन्चिंग में किया गया।

क्या होता क्रायोजेनिक इंजन... - लान्चिंग में भारत के अत्याधुनिक लॉन्च व्हीकल GSLV में क्रायोजेनिक इंजन अपर स्टेज का पहली बार इस्तेमाल किया। - हालांकि इससे पहले भी लॉन्चिंग में क्रायोजेनिक इंजनों का इस्तेमाल हो चुका है, लेकिन ये उड़ान इसलिए अहम है क्योंकि इसमें पहली बार अपर स्टेज क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल हो रहा, जो ज्यादा वजनी सैटेलाइट ले जाने में सक्षम है। - इस उन्नत क्रायोजेनिक इंजन के मुकाम तक आने में भारतीय वैज्ञानिकों को पूरे 20 साल का वक्त लगा है।

कब-कब इसरो ने किया क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल... - भारत लॉन्चिंग 3 बार पहले भी क्रायोजेनिक इंजन इस्तेमाल कर चुका है। - जनवरी 2014 और अगस्त 2015 में डी-6 और डी-7 अभियानों में भी क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल हुआ था। - GSLV-F5 की उड़ान के साथ क्रायोजेनिक इंजन के उन्नत रूप से ज्यादा भेजने की क्षमता को परखा जाएगा।

क्या होता क्रायोजेनिक इंजन ? - क्रायोजेनिक इंजन शून्य से बहुत नीचे तापमान पर काम करते हैं। - माइनस 238 डिग्री फॉरेनहाइट  को क्रायोजेनिक तापमान कहा जाता है। - क्रायोजेनिक इंजन में लिक्विड हाइड्रोजन का उपयोग इंधन के तौर पर होता है। - लिक्विड ऑक्सीजन का ऑक्सीडाइजर के तौर पर इस्तेमाल होता है। - लिक्विड ऑक्सीजन और लिक्विड हाइड्रोजन को क्रायोजेनिक इंजन में जलाया जाता है। - इससे क्रायोजेनिक इंजन को 4.4 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार मिल जाती है।