ISRO ने फिर रचा इतिहास, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति ने दी बधाई


नई दिल्ली (5 जून): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने अंतरिक्ष में एक और इतिहास रच दिया है। ISRO ने भारत के सबसे वजनी रॉकेट को शाम 5:28 बजे श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। मोदी ने ट्वीट के जरिए कहा, 'जीएसएलवी एमके-3 डी1/जीएसएटी-19 मिशन ने भारत को नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च वीइकल के नजदीक पहुंचाया है। देश को गर्व है।'

ISRO ने सबसे भारी रॉकेट GSLV मार्क-3 का वजन करीब 640 टन है। यह भूस्थैतिक कक्षा में 4000 किलो तक का पेलोड ले जा सकता है। GSLV मार्क-3 अन्य देशों के चार टन श्रेणी के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की दिशा में भारत के लिए अवसर खोलेगा।


इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन के मुताबिक यह प्रक्षेपण बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। क्योंकि ISRO प्रक्षेपण उपग्रह की क्षमता 2.2-2.3 टन से करीब दोगुना करके 3.5- 4 टन कर दिया। इससे पहले भारत को 2.3 टन से अधिक के संचार उपग्रह का प्रक्षेपण करने के लिए विदेश जाना पड़ता था। है। GSLV मार्क-3 के कामकाज शुरू करने के बाद भारत संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भर हो जाएगा और विदेशी ग्राहकों को लुभाने में भी सफल होगा।


बताया जा रहा है कि रॉकेट 3,136 किलोग्राम वजनी GSAT-19 कम्युनिकेशन सैटेलाइट के साथ उड़ान भरा है। इसे पृथ्वी से 36,000 किलोमीटर की दूरी पर रखा जाएगा। रॉकेट करीब 15 साल के लिए विकसित किया गया है जिसके निर्माण में 300 करोड़ का खर्च आया है। वैज्ञानिकों ने इसे ‘राक्षस रॉकेट’ का नाम दिया है। रॉकेट में 4 टन तक के सैटेलाइट को लांच करने की क्षमता है।


आपको बता दें कि इससे पहले अमेरिका, रूस, यूरोप, चीन और जापान ही इतने रॉकेट लांच करने में कामयाबी हासिल कर पाए हैं। रॉकेट एक स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन से चलता है जिसमें तरल ऑक्सीजन और तरल हाइड्रोजन का इस्तेमाल होता है। वहीं रॉकेट लांचिंग से भारत को अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने के उद्देश्य में बढ़ाया मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार इसरो ने अपने मिशन के तहत इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए केंद्र सरकार से 12,500 करोड़ रुपए की मांग की है। अगर सरकार इसे मंजूरी देती है तो इसरो द्वारा इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने में सात साल का समय लग सकता है। प्रीमियर स्पेस एजेंसी ने मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए पहले से ही महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं। अंतरिक्ष सूट का मॉडल पहले ही तैयार कर लिया गया है जबकि इसका टेस्ट साल 2014 में कर लिया गया है।