क्या वसंत ऋतु में गिर जाएगी नेपाल की ओली सरकार?

नई दिल्ली (4 फरवरी) :  क्या नेपाल में के पी ओली सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसमें कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं बसंत ऋतु में ओली सरकार गिर ना जाए।

'टाइम्स ऑफ इंडिया'  में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएम ओली को कई दिक्कतों का एक साथ सामना करना पड़ रहा है। लोकतांत्रिक नेपाल के पहले संविधान को लागू करने की कोशिशों के बीच अल्पसंख्यक समूहों का भारी विरोध जारी है। वैसे भी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे ओली की कैबिनेट का स्वरूप ऐसा है जिसमें सदस्यों की आपस में ही राय नहीं मिलती। 63 वर्षीय ओली की कैबिनेट में 6 उपप्रधानमंत्री हैं। इनमें एक राजशाही के समर्थक हैं और एक अल्पसंख्यक मधेसियों के समर्थक। इन्होंने अब तक नए संविधान पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

ओली लेफ्टिस्ट कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस-लेननिस्ट) के नेता हैं। उन्होंने दक्षिणी मैदानी इलाकों में संविधान को लेकर बने तनाव को खत्म करने का वादा किया था। ओली के सत्ता में चार महीने के बावजूद मधेसियों का विरोध जारी है। भारतीय सीमा पर महीनों से मधेसियों ने नाकेबंदी की है। छिटपुट हिंसा और पुलिस के साथ झड़पों का सिलसिला बंद नहीं हुआ है। अगस्त से अब तक 50 लोग मारे जा चुके हैं। जनवरी में पुलिस गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई थी।  

तनाव वाले इलाकों में भारी पुलिस बल अब भी तैनात है। इस पर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। मधेसियों का आंदोलन एक तरफ है। दूसरी तरफ भारत के साथ नेपाल के संबंध भी जैसे नाज़ुक दौर में अब है, वैसे पहले कभी नहीं रहे। नेपाल भारत पर सीमा पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाता रहा है। वहीं भारत इसे नेपाल की अंदरूनी समस्या का नतीजा बताते हुए नेपाल सरकार से नए संविधान पर सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कहता रहा है। जहां तक मधेसियों का सवाल है वे भी चाहते हैं भारत उनके लिए खुल कर सामने आए।

ईंधन-गैस जैसी बुनियादी चीज़ों की भारी किल्लत के ज़रिए लोगों को लंबी लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। लोगों को ज़रूरी सामान के लिए मोटी कीमत चुकानी पड़ रही है। वहीं भ्रष्टाचार के बेतहाशा बढ़ने के आरोप लगाने वालों की भी कमी नहीं है।

हालांकि ओली के करीबी सूत्र नहीं मानते कि ओली सरकार को संकट का सामना है। उनका कहना है कि नेपाल में अगले चुनाव 2018 में निर्धारित है और ओली सरकार तब चलेगी।