चीन में डरे सहमें हैं मुसलमान! शिनजियांग में चल रहा दमनचक्र, पाकिस्तान खामोश

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (12 अप्रैल): चीन में मुस्लिम बहुल इलाके शिनजियांग प्रांत में इन दिनों जबरदस्त दमन चल रहा है। मुसलमानों पर सख्ती बरती जा रही है। मुसलमानों पर नए-नए कानून लादे जा रहे हैं। मस्जिदों में नमाज पढ़ने, रोजा रखने प्रतिबंध पहले से ही चल रहा था अब असामान्य दाढ़ी रखने और सार्वजनिक स्थानों पर मुस्लिम महिलाओँ के नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नई मस्जिदों के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। नियम ना मानने वालो पर देशद्रोह का केस चलाया जा रहा है। समाचार संस्था एसोसिएटेड प्रेस की विशेष रिपोर्ट की मानें तो चीन के सोशल मीडिया में “मुस्लिम-विरोधी” भावनाएं तेजी से पनप रही हैं और ये आग शिनजियांग प्रांत से बाहर पूरे देश में फैलने लगी है। चीन में मुसलमानों पर इतनी सख्ती हो रही है लेकिन दुनियाभर के मुसलमानों की चिंता करने वाला पाकिस्तान चीन पर खामोश है।


मस्जिद बनाने का विरोध- एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी चीन के अनहुई प्रांत की राजधानी हेफई में जब एक मस्जिद बनायी जा रही थी तो गैर-स्थानीय नागरिकों ने उसका तीव्र विरोध किया। विरोध करने वालों ने एक रात मस्जिद बनाने के लिए नियत जमीन पर सूअर का कटा सिर गाड़ दिया। मस्जिद के विरोध में दर्जनों लोगों ने झंडे और बैनर के साथ प्रदर्शन किया। उसके बाद एक स्थानीय मस्जिद के इमाम को धमकी भरा संदेश मिला जिसमें कहा गया था कि तुम्हारे परिवार में कोई मारा जाए तो हम तुम्हें ताबूत उपलब्ध कराएंगे। अगर एक से ज्यादा ताबूत की जरूरत होगी तो वो भी देंगे। हेफई में एक पुरानी मस्जिद है जो 1780 के दशक में सिल्क रूट के कारोबारियों ने स्थापित की थी। इस इलाके में रहने वाले हुई मुस्लिम इस मस्जिद का उसी समय से प्रयोग करते आ रहे हैं।


मुस्लिमों के सामने सिगरेट नहीं पी तो सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने किया बर्खास्त - मुस्लिम धर्मगुरुओं के सामने सिगरेट नहीं पीने के कारण चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने एक अधिकारी को बर्खास्त कर दिया। अधिकारी की गलती यह थी कि उसने शिनजांग प्रांत में मुस्लिम धर्मगुरुओं की मौजूदगी में सिगरेट पीने से परहेज किया था। चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' में मंगलवार को छपी एक खबर के मुताबिक, अधिकारी का डिमोशन करते हुए कहा गया कि उसका यह कदम 'राजनैतिक रूप से अस्थिर' था। अधिकारी पर आरोप है कि उसका यह कदम धर्मनिरपेक्षता के मुताबिक नहीं था और उसने सिगरेट ना पीकर मुस्लिम समुदाय की कट्टरपंथी विचारधारा को सांकेतिक समर्थन दिया।


शिनजियांग प्रांत में दाढ़ी रखने, बुर्का पहनने पर लगा प्रतिबंध- चीन धार्मिक कट्टरपंथ पर नियंत्रण रखने के लिए कई तरीके अपना रहा है। उसने पहले मस्जिदों में नमाज पढ़ने और रोजा रखने प्रतिबंध लगाया। अब दाढ़ी रखने और महिलाओँ के नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीन ने यह आदेश उत्तर-पश्चिम प्रांत शिनजियांग में जारी किया है। शिनजियांग प्रांत वही क्षेत्र है जहां चीन में सबसे ज्यादा मुसलमान रहते हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक क्रियाकलापों के बारे में अब स्थानीय प्रशासन को जानकारी देनी होगी। इन धार्मिक क्रियाकलापों में खतना, निकाह, अंतिम संस्कार तक शामिल किया गया है। इन क्रियाकलापों से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को पूरी जानकारी देनी होगी। जो लोग सरकार के इस कानून की अवहेलना करेगा उसे देशद्रोही माना जायेगा।


अपने देश के मुसलमानों पर चीन को नहीं है भरोसा- चीन में जिन इलाकों में मुस्लिम आबादी है वहां जबरदस्त दमन चल रहा है। मुसलमानों पर सख्ती की जा रही है। मस्जिदों में नमाज पढ़ने, रोजा रखने पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। मुसलमानों पर नए-नए कानून लागू किए जा रहे हैं। बुधवार को चीनी सरकार ने नया फरमान जारी किया जिसमें कहा गया कि मुस्लिम आबादी को धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी अब से चीनी सरकार को देनी होगी। अगर ऐसा नहीं किया गया तो इसे देशद्रोह माना जाएगा। चीन में मुसलमानों पर इतनी सख्ती हो रही है लेकिन दुनियाभर के मुसलमानों की चिंता करने वाला पाकिस्तान चीन पर खामोश है।


शिन्जियांग में बढ़ते आंतकवाद चीन की उड़ चुकी है नींद- शिन्जियांग प्रांत चीन का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल प्रांत है। शिन्जियांग प्रांत की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने चिंता जताई थी। चीन का मानना है कि शिन्जियांग के मुस्लिम युवा आतंकी ट्रेनिंग ले रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में उन्हें आतंकी ट्रेनिंग मिल रही है ट्रेनिंग के बाद ये आतंकी शिन्जियांग में छिटपुट वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। 11 जनवरी को शिन्जियांग के होतन प्रांत में 3 आतंकी मारे गए थे। इससे पहले होतन में 28 दिसंबर को आतंकियों ने 5 लोगों की हत्या कर दी थी।


मुसलमानों की बढ़ती संख्या से डरा चीन- शिनजियांग चीन का उत्तर-पश्चिम में बड़ा प्रांत है। इसकी सीमाएं पीओके और अफगानिस्तान से मिलती है। शिनजियांग चीन का मुस्लिम बहुल प्रांत है। शिनजियांग की आबादी 2.18 करोड़ है। आबादी का 50 फीसदी मुसलमान हैं। प्रांत में 24,800 धार्मिक स्थल हैं। इनमें से 24,400 मस्जिद हैं। 29,300 धार्मिक गुरुओं में से 29 हजार इमाम हैं।


शिनजियांग में मुस्लिम आबादी- चीन में दो बड़े मुस्लिम समुदाय हैं 'उईघुर' और 'हुई'। दोनों समुदाय शिनजियांग प्रांत में ही रहते हैं। उईघुर पूरी आबादी का 45 प्रतिशत और और हुई 4.8 प्रतिशत है। यहां रहने वाले लोग ऐसी भाषा बोलते हैं जो तुर्की के करीब है। ये लोग सांस्कृतिक आधार पर मध्य एशिया के हिस्सों के करीबी हैं। हालांकि चीन की आबादी के महासागर में दोनों की संख्या बूंद के समान है। चीन धार्मिक असहिष्णुता के लिए कुख्यात माना जाता है। तिब्बत में बौद्ध, शिनजियांग में मुसलमान और झेजियांग में ईसाई। तीनों प्रांतों में इन्हें प्रताड़ित और धार्मिक-स्थलों को अपवित्र किया जाता है।शिनजियांग में महिलाओं के पर्दा करने पर रोक है। मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को रमजान में रोजा नहीं रखने दिया जाता। चीनी सरकार की प्रताड़ना का सबसे ज्यादा शिकार उईघुर समुदाय होता है। शिनजियांग में रहने वाला उईघुर समुदाय कट्टर मुस्लिम माना जाता है। हुई समुदाय में इस्लाम की कट्टरता नजर नहीं आती। अधिकतर लोग पड़े-लिखे होते हैं, बिजनेस और जॉब्स से जुड़े हैं।


शिनजियांग में क्यों मचा है संग्राम- उइगर लोगों का चीनी प्रशासन से टकराव शिनजियांग के इतिहास का हिस्सा रहा है। 1990 में सोवियत यूनियन के टूटने के बाद से यहां प्रदर्शनों की शुरुआत हुई। उइगर लोग चीन से आजादी की मांग करने लगे, चीन ने इसे बर्बरता से कुचल दिया। सांस्कृतिक भिन्नता से विपरीत आर्थिक वजहों से भी उइगरों में रोष है। चीन ने यहां नौकरी के अहम पद मूल लोगों को न देकर हान चीनियों को दिए गए। शिनजियांग में ये भी कारण रहा है, जिसने उइगरों में गुस्सा भड़काया। चीन ने कठोर नीति अपनाकर मस्जिद और धार्मिक स्कूल भी बंद करा दिए। 2014 में, सरकार के कुछ विभागों ने रमजान के महीने में रोजा रखने पर रोक लगा दी। 18 साल से कम उम्र के बच्चे मस्जिदों में नहीं जा सकते। फरवरी 2015 में शिनजियांग में धार्मिक आजादी को दबाने की एक और कोशिश की। चीन ने शिनजियांग की सड़कों पर मौलवियों को जबरन डांस के लिए मजबूर किया। मौलवियों से यह शपथ भी दिलवाई गई कि वह बच्चों को किसी तरह की धार्मिक शिक्षा नहीं देंगे।