'इस्लामिक स्टेट जेहाद नहीं, फसाद फैला रहा है'

नई दिल्ली(21 मार्च): डेढ़ साल पहले अपने व्यापक आंदोलन से नवाज शरीफ सरकार को हिला देने वाले पाकिस्तान के धर्मगुरू प्रोफेसर मोहम्मद ताहिर उल कादरी ने आतंकवाद को भारत और पाकिस्तान का दुश्मन बताते हुए रविवार को कहा कि धर्म के नाम पर आतंकवाद फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विश्व सूफी सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रो. कादरी ने कहा कि धार्मिक संकीर्णता के कारण ही पूरी दुनिया में उग्रवाद और आतंकवाद को बढ़ावा मिला है जिससे आज मानवता बुरी तरह प्रभावित है और लाखों की संख्या में लोग इससे प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान दुश्मन नहीं हैं, उनका असली दुश्मन आतंकवाद है। दोनों देशों में जहां भी धर्म के नाम पर आतंकवाद फैलाया जाता है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। धार्मिक संकीर्णता को बढ़ाकर कुछ लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति कर रहे हैं और इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। प्रो. कादरी ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ पुरी दुनिया को एकजुट होकर अभियान चलाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि धार्मिक कट्टरवाद ने लोगों को न केवल इस्लाम से दूर किया बल्कि इस्लाम के खिलाफ पूरी दुनिया में नफरत का माहौल बना दिया है। इसलिए हमें इस्लाम की मूल छवि पेश करके नफरत के इस माहौल को खत्म करना चाहिए ताकि दुनिया में शांति और स्थिरता का माहौल पैदा हो। भारत और पाकिस्तान दोनों में शिक्षण संस्थानों में सूफीवाद पढ़ाया जाना चाहिए जिससे आतंकवाद पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सूफीवाद को सही मायने में समझने से लोगों को पता चलेगा कि जो इस्लामिक स्टेट (आईएस) कर रहा है वह जेहाद नहीं बल्कि फसाद है। इससे पहले ऑल इंडिया उलेमा और मशाईख बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना अशरफ कछोछी ने चार दिन चले सम्मेलन में आतंकवाद की निंदा करते हुए कहा कि सूफीवाद के सिद्धांतों पर चलकर इसका मुकाबला किया जा सकता है। सम्मेलन के चौथे दिन समापन सत्र में अपने अध्यक्षीय धर्मोपदेश में उन्होंने दरगाहों और विद्वानों में गठबंधन की पुरजोर वकालत करते हुए आतंकवाद के खिलाफ व्यापक अभियान चलाए जाने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि देश में हिंसा और आतंकवाद के उन्मूलन के लिए दरगाहों को एक मंच पर आना चाहिए जिससे कि पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित करके नई ऊर्जा के साथ देश-विदेश में शांति, भाईचारा और राष्ट्रीय सद्भाव को जीवित कर सकते हैं। मौलाना कछोछी ने सम्मेलन का घोषणा पत्र जारी करते हुए इस्लाम और सूफी विद्वानों की शिक्षाओं का पालन करने पर बल दिया।

उन्होंने भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति और देश के गौरवशाली लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का भी एलान किया। सांप्रदायिकता की ङ्क्षनदा करते हुए उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता का बीज बोने वाले भारत की एकता एवं अखंडता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं इसलिए ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार को सख्त रुख रखना चाहिए। उन्होंने सरकार से सूफीवाद के संरक्षण के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की अपील की ताकि सदियों पुरानी राष्ट्रीय सद्भाव की परंपरा को जीवित रखा जा सके। मौलाना अशरफ ने कहा कि सूफीवाद जहां भी मजबूत होता है वहां आतंकवाद का जोर कम हुआ है।

उन्होंने उलेमा और मशाईख बोर्ड अधिसूचना के संबंध में सरकार के सामने कई मांगें भी रखी। इन मांगों में स्कूलों और मदरसों के शैक्षिक पाठ्यक्रम में सूफीवाद की शिक्षाओं को शामिल करना, दरगाहों को मुख्यधारा से जोड़ा जाना, दरगाहों तक पहुंच के लिए ढांचागत सुविधाओं का निर्माण, प्रमुख शहरों में सूफी केंद्रों की स्थापना, दिल्ली में केंद्रीय सूफी सेंटर की स्थापना और देश के सभी विश्वविद्यालयों में सूफी चेयर की स्थापना आदि प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि सूफीवाद के अध्ययन के लिए सरकार को फारसी की शिक्षा के लिए अलग शैक्षिक संस्थान स्थापित कर उनके लिए अलग से बजट आवंटित करना चाहिए। सम्मेलन में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने और उन्हें उच्च शिक्षा देने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया विश्वविद्यालय और दूसरे प्रमुख संस्थानों का अल्पसंख्यक चरित्र बहाल रखने के संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया।