'आतंक को बढावा पाक की नीति'

नई दिल्ली(18 अगस्त): मंगलवार को जब अमेरिका के स्टेट विभाग के प्रवक्ता मार्क टोनर से भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर और आतंकवाद पर बातचीत से जुड़ा एक सवाल पूछा गया, तो अपने परंपरागत जवाब के बाद उन्होंने कहा, 'हम दोनों देशों के बीच वार्ता और आतंकवाद के विरोध को लेकर एक-दूसरे का सहयोग किए जाने का समर्थन करेंगे। इसमें दोनों देशों का भला है। इसमें उस क्षेत्र का भी हित है। सीधे तौर पर कहें, तो यह अमेरिका के भी हित में है।'

- पाकिस्तानी मीडिया को मार्क की प्रतिक्रिया में यह खबर नजर आई कि अमेरिका कश्मीर पर बातचीत का पक्ष ले रहा है। वहीं भारतीय मीडिया के लिए खबर कुछ और थी। मार्क ने अपनी प्रतिक्रिया में आगे कहा, 'यह जरूरी है कि पाकिस्तान ना केवल अपने देश में, बल्कि पूरे क्षेत्र में कहीं भी और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को रोकने के लिए पूरी कोशिश करे। ऐसे में जरूरी है कि सहयोग का दायरा बढ़े और विमर्श के अवसर बढ़ें। इस दिशा में किसी भी कोशिश का हम समर्थन करेंगे।'

- पाकिस्तानियों को इस बात की राहत थी कि अमेरिकी अधिकारियों ने भारत द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर पर किए गए दावे को मान्यता नहीं दी। पिछले दिनों बलोच और मुहाजिर वैसे भी वाइट हाउस और कैपिटल हिल पर प्रदर्शन कर पाकिस्तान को काफी सिर दर्द दे चुके हैं। उधर भारत के लिए राहत की बात है कि जिसे पाकिस्तान 'आजाद कश्मीर' कहता है, उसे भी अमेरिका कश्मीर के विवाद का अंग मानता है। भारत की कोशिश है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवाद का साथ दिए जाने की बात अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने लाकर वह कश्मीर पर पाक के दावे को बिल्कुल बेबुनियाद साबित कर दे।

- हाल ही में आयोजित एक थिंकटैंक परिचर्चा में एक अमेरिकी स्कॉलर ने पाकिस्तान द्वारा बार-बार कश्मीर के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का प्रसंग उठाए जाने पर तीखा कटाक्ष किया था। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की प्रफेसर क्रिस्टीन फेयर ने कहा, 'क्या आपने वह प्रस्ताव पढ़ा है? अगर आपने नहीं पढ़ा, तो मैं आपको सलाह दूंगा कि आप वह शानदार प्रस्ताव पढ़ लीजिए जिसका जिक्र हर पाकिस्तानी करता जरूर है, लेकिन एक ने भी उसे पढ़ा नहीं है।' परिचर्चा में अपने साथी पाकिस्तानी वक्ता को आड़े हाथों लेते हुए क्रिस्टीन ने कहा, 'वे सारे पाकिस्तानी जो कि जनमत संग्रह नहीं कराए जाने को लेकर दुखी हैं, इसके लिए अपनी ही सरकार को कसूरवार ठहरा सकते हैं। क्योंकि पाकिस्तान ने वे जरूरी शर्तें पूरी ही नहीं की। मैं आपको सलाह दूंगी कि इससे पहले कि आप दोबारा खुद को मूर्ख साबित करें, आप UN का प्रस्ताव पढ़ लीजिए।'