'जन्नत का ख्वाब दिखाकर जहन्नुम के रास्ते पर डाल देता है ISIS'

नई दिल्ली (4 मई): अफ्रीकी मूल का जर्मन नागरिक हैरी सर्फो अब फिदायीन नहीं है। वो जन्म से ईसाई था। घाना से उसके माता-पिता जर्मनी में आकर बस गये थे। माता-पिता में तकरार हुई और वो अलग हो गये। हैरी किसके पास रहेगा। यह तय नहीं हो पाया। लिहाजा उसका बचपन बड़ा अस्त-व्यस्त रहा और उसकी पढ़ाई-लिखाई भी नहीं हो पायी। 'इंडिपेंडेंट' ने लिखा है कि वो जर्मनी से लंदन आ गया रॉयल मेल सर्विस में पोस्टमैन बन गया। वो कुछ कट्टपंथियों की संगत में पड़ गया। उसने धर्म परिवर्तन किया और सीरिया पहुंच गया।

उसने आईएसआईएस ज्वाइन कर लिया। उसे ज़िहाद का पाठ पढाया गया और स्पेशल कमांडो की ट्रेनिंग दी गयी। उसे प्रोपेगंडा वीडियो में दिखाया गया। लेकिन जल्दी ही उसे आईएसआईएस की असलियत का पता चल गया। उसे अहसास हो गया कि जन्नत का जो ख्वाब उसे दिखाया गया था वो उसे जहन्नुम की ओर ले जा रहा है। वो मासूमों का कत्ल कर रहा है। आईएसआईएस की करतूतें कुरान के खिलाफ हैं। उनका मकसद सिर्फ मारना, लूटना, अय्याशी करना और अपनी हुकूमत करना है। आईएसआईएस के भीतर गंदगी ही गंदगी है। हैरी ने आईएसआईएस के चंगुल से भाग निकलने की ठान ली। उसने तय किया कि इन गंदे लोगों के लिए जान गंवाने से बेहतर अपने देश में जाकर मरना बेहतर है।

 

इसलिए एक दिन वो सीरिया से आईएसआईएस के शिकंजे को तोड़कर भाग निकला और सीधे जर्मनी आ गया, और उसने पुलिस के आगे समर्पण कर दिया। हैरी चाहता है कि आईएसआईएस के प्रोपेगंडा वीडियोज़ की सच्चाई उन युवकों के सामने आनी चाहिए जो उसके भ्रम जाल में फंस जाते हैं और जन्नत मिलने के लालच में जहन्नुम के रास्ते पर चल पड़ते हैं। हैरी का कहना है कि वो जेल से रिहा होने के बाद जर्मनी और इंग्लैण्ड के उन युवाओँ के बीच समय बितायेगा जिनके दिल-दीमाग में आईएसआईएस ने जन्नत का भ्रम भर दिया है।