यज़ीदी लड़की की आपबीती-मर्द रेप करते और उनकी बीवियां जबरन गर्भ निरोधक खिलातीं'

नई दिल्ली (29 मार्च): आईएसआईएस के चंगुल से रिहा हुई ख़ालिदा नाम की यज़ीदी लड़की की आपबीती सुन कर रौंगटे खड़े हो जाते हैं। एक दिन मे आठ-आठ बार सामुहिक बलात्कार का शिकार हुई ये लड़की जब तक होश में आती तब तक उसको किसी और के हाथ बेच दिया जाता था।

'डेली मेल डॉट को डॉट यूके' ने लिखा है कि लगभग डेढ़ साल साल तक आईएसआईएस के गुर्गों की हैवानियत का शिकार रही ख़ालिदा ने तीन बार भागने की कोशिश की। ख़ालिदा ने बताया कि हर बार उसे कोई न कोई अरब फैमिली टकराती वो उनके सामने रोती-गिड़गिड़ाती और मदद की गुहार लगाती मगर वो लोग उसे यह कह कर वापस आईएसआईएस के कैंप में भेज देते कि तुम यज़ीदी हो, तुम्हारी कोई मदद नहीं हो सकती.।ख़ालिदा ने जुल्म की दुनिया से निज़ात पाने के लिए कई बार आत्महत्या की भी कोशिश की। एक बार तो उसने बिजली के नंगे तार भी पकड़ लिए लेकिन संयोग से बच गयी। ख़लिदा बताती है कि आईएसआईएस के लोग उसे जबरन गर्भनिरोधक गोलियां खिलाया करते थे।

यह काम उनके घर की महिलाओँ के जिम्मे होता था। अगर उन्हें शक हो जाता था कि कन्ट्रासेप्टिव पिल्स नहीं खायी है, तो वो जबरन कन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन लगवा देती थी। ख़ालिदा बताती है कि जब आईएसआईएस ने हमला किया तो हमारे एक पड़ौसी ने हमारी मदद का भरोसा दिया था। हमसे काफी पैसा भी वसूला था। सिंजर बॉर्डर क्रॉस करते वक्त उन्हीं पड़ोसियों ने आईएसआईएस के लोगों को इशारा कर दिया कि हम लोग गैरमुस्लिम हैं।  उन लोगों ने 34 लोगों के हमारे परिवार को बंधक बना लिया। पहले मर्द और औरतों को अलग किया गया।

उसके बाद शादी-शुदा और कुंवारी लड़कियों को अलग किया गया। कुंवारी लड़कियों को एक बस में भर कर रक्का के एक बड़े से हॉल में ले जाया गया। जहां यज़ीदी लड़कियों की परेड हो रही थी। आईएसआईएस के लोग लड़कियों के साथ ऐसा बर्ताव कर रहे थे जैसे शो रूम में रखी गयी कारों की ट्रायल राइड की जाती है।

'डेली मेल डॉट को डॉट यूके' ने लिखा है कि 18 साल की ख़ालिदा और उसकी कज़िन को एक बूढ़े ने खरीदा। वो उन्हें अपने घर ले गया। और वहां से शुरु हुआ बलात्कार और जुल्म का अंतहीन सिलसिला तब रुका जब आखिरी शख्स ने 24 हज़ार डॉलर लेकर उसे मौसूल के पास रिहा किया। वहां से पांच किलोमीटर पैदल चल कर वो पशमेगरा फाइटर्स के पास पहुंची और वहां से रिहेब्लिटेशन कैंप में।