आईएस से हमदर्दी तो पासपोर्ट होगा रद्द

मनीष पांडेय, नई दिल्ली (18 जुलाई): आतंकी संगठन आईएसआईएस से हमदर्दी रखने वाले 2000 हजार युवाओं के पासपोर्ट रद्द हो सकते हैं। केन्द्र सरकार ने इसके लिए कार्रवाई शुरू कर दी हैं। खुफिया एजेंसिंयों का मानना हैं कि ये युवा कट्टर सोच से प्रभावित हैं और आईएस के बहकावें में आकर कोई गलत कदम उठा सकते हैं।

केरल से आईएसआईएस का झंडा उठाने पहुंचे 21 लोगों के बाद हरकत में आई सरकार ने पासपोर्ट रद्द करने की कयावद षुरू की हैं। सरकार की रणनीति हैं कि इनके पासपोर्ट रद्द कर संदिग्धों को विदेश जाने से रोका जाएं। करीब एक हजार युवा ऐसे हैं जो संदेहियों के संपर्क में हैं, उनकी निगरानी की जा रही हैं। इन्हें सर्विंलेंस केटैगरी में रखा गया हैं।

आतंकी संगठन आईएसआईएस के प्रति भारतीय युवाओं में बढ़ती जिज्ञासा के कारण कई युवा अनजाने में इस आतंकी संगठन के संपर्क में आ रहे हैं। केरल से लापता हुए 21 लोगों के आईएसआईएस के संपर्क में जाने के बाद जांच एजेंसिंयों ने तकनीकी और मानवीय पहरा कड़ा कर दिया है। आतंकी संगठन के भड़काऊ और आपत्ति जनक भाषण और साहित्य के चलते करीब 84 साईट पर पाबंदी लगाई हैं।

जांच एजेंसी के सू़त्र बताते हैं कि केरल कासरगोड से 17 और पलक्कड से चार लोग लापता हुए हैं। केरल कैडर इन लोगों ने सीरिया और अफगानिस्तान में जिस लिंक से जुड़कर चैटिंग की है, उसी लिंक से जुड़े देश भर के करीब 2000 युवाओं को आब्जरवेशन में रखा गया हैं। इन युवाओं ने लिंक पर चैटिंग करने के साथ कमेंटस भी किए है। अब जांच ऐजेंसी का तर्क हैं कि ये युवा आईएस कैडर के संपर्क में हैं। साक्ष्य मिलते ही इनका पासपोर्ट रद्द कर दिया जाएं, जिससे इन्हें सरहद पार जाने से रोका जा सके।

कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्‍ट्र, जम्मू-कश्‍मीर, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना से संबंधित हैं। अंतरराष्ट्रीय एयर पोर्ट पर भी  अतिरिक्त सर्तकता बरतने को कहां गया हैं। इधर गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखण्ड सहित आधा दर्जन राज्यों के एक हजार युवाओं को निगरानी में रखा गया हैं। इन युवाओं के संदिग्ध युवकों के संपर्क में रहने का अंदेशा हैं। जांच एजेंसी आतंकी संगठनों से युवाओं को दूर रखने के लिए नए मानिटरिंग सिस्टम पर भी विचार कर रही हैं।

सभी सुरक्षा और खुफिया जांच एजेंसियों के साथ चुनिंदा राज्यों के प्रदेश पुलिस मुखियाओं की बैठक जुलाई के अंतिम सप्ताह में रखी गई हैं। बैठक का मकसद खुफिया एजेंसिंयों की सूचनाओं का आदान-प्रदान ओर बेहतर समन्यव हैं। सूत्र बताते हैं कि चिंता इस बात से और अधिक हैं कि मई में आईएसआईएस द्वारा जारी किए गए कथित विडियों में भारत में तबाही मचाने की साजिश  रचने को कहां गया था। खुफिया जांच एजेंसियां अब छोटे-छोटे स्पेशल सेल बनाकर हर संदेही की मॉनिटरिंग कर रही हैं।