पाक हाई कमिशन जासूसी कांड: क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में कई सनसनीखेज दावे

नई दिल्ली(28 जनवरी): पाकिस्तानी हाई कमिशन के कर्मचारी का दिल्ली में जासूसी कनेक्शन के भंड़ाफोड़ के तीन महीने बाद क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट फाइल कर दी है।

- चार्जशीट समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य चौधरी मुनव्वर सलीम के निजी सहायक फरहत खान समेत 4 गिरफ्तार लोगों के खिलाफ दाखिल की गई है।

- चार्जशीट में कई सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं। आरोपियों के पास से भारतीय सैन्य ठिकानों से जुड़ी कई गोपनीय जानकारियां मिली थीं जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान सीमा से सटे इलाके में खुद को मजबूत करने के लिए कर सकता था।

- चार्जशीट में सलीम समेत 12 लोगों को गवाह को तौर पर शामिल किया गया है। पाकिस्तानी हाई कमिशन के कर्मचारी मोहम्मद अख्तर के खिलाफ चार्जशीट नहीं दाखिल की गई है क्योंकि उसे राजनयिक छूट प्राप्त थी।

- फरहत को जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) रविन्द्र यादव के नेतृत्व में 26 अक्टूबर 2016 को दिल्ली चिड़ियाघर के बाहर तीन भारतीय एजेंट के साथ गोपनीय कागजात को लेने के दौरान रंगे हाथ पकड़ा था।

- फरहत के अलावा मौलाना रमजान खान, सुभाष जांगिड़ और साहेब हुसैन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। 19 पेज की चार्जशीट में आरोपियों पर IPC की धारा 3 और 9 के तहत 120बी (आपराधिक षडयंत्र) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

- रमजान खान से हासिल किए गए दस्तावेज में भारतीय सैन्य ठिकानों से जुड़ी कई गोपनीय जानकारी मिलने का दावा किया गया है।

- चार्जशीट में कहा गया है कि रमजान से मिले दस्तावेज में सर क्रीक बॉर्डर पर भारतीय सैना की तैनाती, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल की जानकारी का जिक्र था। इससे भारतीय सैनिकों की जान को खतरा हो सकता था। इस गोपनीय दस्तावेज के आधार पर पाकिस्तान युद्द के दौरान अपनी तैनाती को सुधारकर भारत पर बढ़त हासिल कर सकता था।

- क्राइम ब्रांच द्वारा दाखिल चार्जशीट में पाकिस्तानी हाई कमिशन के स्टाफ अख्तर ने कई बड़े खुलासे का जिक्र किया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि अख्तर पाक हाई कमिशन में ISI के खुफिया विंग के प्रमुख सैयद फारुख को रिपोर्ट करता था। अख्तर ने कथित तौर पर क्राइम ब्रांच को बताया कि वह पाकिस्तानी सेना की 40वीं बलूच रेजिमेंट में हेड कांस्टेबल था। बाद में उसे वहां से ISI में भेज दिया गया। फिर वहां से ट्रेनिंग मिलने के बाद अख्तर को भारत में जासूसी के लिए भेजा गया।

- पूछताछ में अख्तर ने बताया, 'एसपी एमपी सलीम का निजी सहायक फरहत खान 1996 से ही ISI के संपर्क में था।' अख्तर ने कहा, 'मैं पैसे देकर लंबे समय से गोपनीय कागजात हासिल कर रहा था। ISI इसके लिए मुझे एडवांस में या फिर बिल देने पर पैसे देती थी। 26 अक्टूबर को रमजान और सुभाष मुझे गोपनीय कागजात देने के लिए ही चिड़ियाघर आए थे। इन दोनों को हवाला चैनल के जरिए पैसे मिले थे।'

- अख्तर ने दावा किया कि भोपाल, हैदराबाद और मेवात के कई लोगों ने उसे गोपनीय कागजात दिए थे। उसने बताया कि भारतीय एजेंट कभी भी उसके निजी मोबाइल नंबर पर फोन नहीं करते थे। उसने बताया कि कैसे नागपुर और राजस्थान के लोकल साइबर कैफे से उनसे सूचनाएं भेजीं। इस मामले में जल्द की पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी।