नेपाल में सियासी रस्साकशी : क्या ओली सत्ता छोड़ने के 'जेंटलमैन समझौते' को नहीं मान रहे?

नई दिल्ली (31 मई) : क्या एक महीने पहले नेपाल के प्रधानमंत्री के पी ओली और माओवादी नेता पुष्प कमल दहल के बीच कोई 'जेंटलमैन समझौता' हुआ था?  दोनों नेता इस समझौते को लेकर अलग अलग दावे कर रहे हैं।

बता दें कि दहल पहले इस कोशिश में थे कि मुख्य विरोधी दल नेपाली कांग्रेस से समर्थन लेकर नई सरकार का गठन करें और खुद प्रधानमंत्री बनें। लेकिन फिर उन्होंने पासा पलटते हुए मौजूदा ओली सरकार को समर्थन देना जारी रखा था। बताया जा रहा है कि दहल ने ये कदम ओली के साथ हुए समझौते के बाद ये कदम उठाया था। इसके मुताबिक ओली ने मंजूर किया था कि सदन में बजट पास होने के बाद वे दहल के पक्ष में सत्ता से हट जाएंगे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब जब बजट पास हो चुका है तो माओवादी दबाव बना रहे हैं कि नेतृत्व में परिवर्तन किया जाए। लेकिन उन्हें ओली के रुख के चलते निराश होना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को साफ कर दिया कि उनके और दहल के बीच 'जेंटलमैन समझौते' जैसी कोई बात नहीं हुई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 29 अप्रैल को 9 सूत्री समझौता हुआ था। इसके तहत ओली ने वादा किया था कि सरकार माओवादी नेताओं के ख़िलाफ़ 'राजनीति से प्रेरित'  सभी मुकदमे वापस ले लेगी। साथ ही माओवादी कार्यकर्ताओं के खिलाफ 'गड़बड़ी' के वक्त के मानवाधिकार उल्लंघन के मुकदमों को भी वापस ले लिया जाएगा। हालांकि ये राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत होता।

हालांकि ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल के तीन वरिष्ठ नेताओं- माधव नेपाल, झालनाथ खनल और बामदेव गौतम ने भी ओली और दहल के बीच समझौता कराने में योगदान दिया था। इसके मुताबिक बजट पास होने के बाद ओली की जगह दहल को पीएम बनना था।

माधव नेपाल ने हाल में कहा कि हमारी सहमति दहल को राष्ट्रीय एकता सरकार का पीएम बनाने के लिए हुई थी ना कि बहुमत सरकार का। ओली अब भी राष्ट्रीय एकता सरकार बनवाने की कोशिश में है, जिसकी संभावना बहुत क्षीण नज़र आती है। ओली ऐसी स्थिति में सत्ता की पकड़ अपने हाथ में ही रखना चाहते हैं।

उधर माओवादी नेता और कृषि मंत्री हरिबोल गाजुरेल ने कहा है कि अगर दहल को पीएम नहीं बनाया गया तो यूएमएल को नुकसान उठाना पड़ेगा।

ऐसे हालात में ओली के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही है। देखना होगा कि नेपाल में सियासत का ऊंट किस करवट बैठता है।