जेएनयू की घटना को लेकर चढ़ा सियासी पारा

अमित कुमार, नई दिल्ली (13 फरवरी): जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारों के मामले की आग शांत होने के बजाए और भड़कती जा रही है। जेएनयू छात्र संघ के अधय्क्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने 7 और छात्रों को हिरासत में लिया है। दूसरी तरफ इस मसले पर सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है। आज वाम पंथी पार्टियों और जेडीयू नेताओं ने इस मसले पर गृहमंत्री से मुलाकात की। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर केंद्र सरकार पर हल्ला बोला। वहीं बीजेपी पूरे दमखम के साथ कह रही है कि राष्ट्रविरोदी बातों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जेएनयू कैंपस में लगे नारों ने ऐसा बवंडर खड़ा कर दिया है जो जल्द शांत होता नहीं दिख रहा। वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, डी राजा और जेडीयू नेता केसी त्यागी ने गृह मंत्र राजनाथ सिंह से इस मसले पर मुलाकात की। गृहमंत्री से जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की रिहाई की मांग की गई। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने हालात को आपातकाल से बदतर करार दिया।

जेएनयू में हुई राष्ट्रविरोधी नारेबाज़ी को लेकर सीपीआई नेता डी राजा की बेटी का नाम लिए जाने से माहौल और गरमा गया। वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर इस मसले पर केंद्र सरकार को घेरा। राहुल ने ट्वीट किया है कि भारत विरोधी भावना को स्वीकार नहीं किया जा सकता, लेकिन आवाज़ उठाने का अधिकार लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। मोदी सरकार और ABVP जेएनयू जैसे संस्थानों को इसलिए धमका रहे हैं क्योंकि वो उनकी विचारधारा को नहीं मानते, ये पूरी तरह निंदनीय है।

राहुल गांधी के अलावा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर केंद्र को घेरा है। केजरीवाल ने ट्वीट किया है कि मोदी जी पुलिस का इस्तेमाल कर सबको भयभीत करना चाहते हैं। विरोधी केंद्र के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए हैं तो दूसरी तरफ केंद्र के मंत्री ये ही कह रहे हैं कि राष्ट्रविरोध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूसरी तरफ बीजेपी भी इस मसले पर लगातार हल्ला बोल रही है। बीजेपी सांसद महेश गिरी ने अब आरोप लगाया है कि जेएनयू में हुई राष्ट्रविरोधी नारेबाज़ी में सीपीआई नेता डी राजा की बेटी भी शामिल थी।

सियासत के ये तेवर साफ संकेत दे रहे हैं कि ये मामला जल्द शांत होने वाला नहीं है, लेकिन इसे लेकर जो बयानबाज़ी और सियासत हो रही है, उससे कई अहम सवाल खड़े होते हैं। सवाल ये है कि क्या जेएनयू राष्ट्रविरोध का अड्डा बन गई है या JNU के बहाने विरोधियों से बदला लिया जा रहा है।

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