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चंद्रशेखर की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकारा, कहा- पाकिस्तान में नहीं है जामा मस्जिद

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लेकर किए गए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली से भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (handra shekhar azad) को गिरफ्तार कर लिया गया था। मंगलवार को आजाद की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है। तीस हजारी कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि जामा मस्जिद के सामने शांतिपूर्वक प्रदर्शन होने देने में उन्हें दिक्कत क्या थी।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 जनवरी):  नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लेकर किए गए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली से भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (handra shekhar azad) को गिरफ्तार कर लिया गया था। मंगलवार को आजाद की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है। तीस हजारी कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि जामा मस्जिद (jama masjid) के सामने शांतिपूर्वक प्रदर्शन होने देने में उन्हें दिक्कत क्या थी। कोर्ट में पाकिस्तान तक का जिक्र आया। कोर्ट ने आगे भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर को उभरता नेता भी कहा। दरअसल, जामा मस्जिद पर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदर्शन के चलते चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें वहां प्रदर्शन की इजाजत नहीं थी। इस प्रदर्शन के बीच दरियागंज में हिंसा भी हुई थी।

कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि कौन से कानून में लिखा है कि धार्मिक स्थान के बाहर प्रदर्शन नहीं किया जा सकता? आगे कहा गया कि लोग शांति से कहीं भी प्रदर्शन कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा, 'लोग शांति से कहीं भी प्रदर्शन कर सकते हैं। जामा मस्जिद पाकिस्तान में नहीं है जो वहां प्रदर्शन नहीं करने दिया जाए। शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन तो पाकिस्तान में भी होने दिया जाता है।'

बता दें कि दिल्ली के दरियागंज, सीलमपुर इलाके में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ जो प्रदर्शन हुआ था उस दौरान हिंसा हुई थी। इसी हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को गिरफ्तार किया था। धरना प्रदर्शन को लेकर अदालत ने कहा कि कोई भी प्रदर्शन कर सकता है। मैंने कई नेताओं को बड़े नेता बनते, मुख्यमंत्री बनते देखा है। प्रदर्शन करना किस अपराध की श्रेणी में आता है?

आजाद ने दावा किया कि प्राथमिकी में उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं जो न केवल ‘आधारहीन’ हैं, बल्कि ‘अजीब’ भी हैं। आजाद की जमानत याचिका वकील महमूद प्राचा के जरिए दाखिल की गई। इसमें कहा गया है कि प्राथमिकी में आजाद की विशेष भूमिका की जानकारी नहीं है और उसकी सामग्री ‘अनिश्चित’ और ‘अटकलों’ एवं ‘संदेह’ पर आधारित है, जबकि वह शांति कायम रखने की कोशिश कर रहे थे।

दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश वकील ने कहा कि हमें जो ड्रोन फुटेज मिली है, उसमें साफ तौर से दिख रहा है कि चंद्रशेखर किस तरह भीड़ को भड़काने वाला भाषण दे रहे हैं। लेकिन इसपर चंद्रशेखर के वकील महमूद प्राचा ने पलटवार किया और कहा कि उन्होंने ऐसा कोई भाषण नहीं दिया है, वह सिर्फ CAA और NRC को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे।

आजाद के संगठन भीम आर्मी ने 20 दिसंबर को पुलिस की अनुमति के बिना सीएए के खिलाफ जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक मार्च का आयोजन किया था। इस मामले में गिरफ्तार अन्य 15 लोगों को अदालत ने नौ जनवरी को जमानत दे दी थी। भीम आर्मी प्रमुख ने अपनी याचिका में कहा कि वह मामले की जांच में पूरा सहयोग करने को इच्छुक हैं और वह किसी सबूत से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करेंगे।


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