16 साल तक इरोम पर मणिपुर सरकार ने खर्च किए 10 हजार रुपए महीना

नई दिल्ली(10 अगस्त): अनशन तोड़कर राजनीति में कदम रखने जा रही इरोम शर्मिला दरअसल तकनीकी रूप से भूख हड़ताल पर थी ही नहीं। उन्हें लगातार 16 साल से नाक के जरिए दिन में तीन बार जबरन विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर रिच डाइट दी जाती थी। 

- मणिपुर सरकार इस डाइट पर पिछले 16 साल से 10,000 रुपए मंथली खर्च कर रही थी। इरोम ने मंगलवार को शहद के साथ यह हड़ताल तोड़ी। बता दें कि उन्होंने राज्य में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट के विरोध में साल 2000 से खाना-पीना छोड़ दिया था। 

- मणिपुर सरकार ने उन्हें जवाहरलाल नेहरू ऑफ मेडिकल साइंसेस (जेएनआईएमएस) में रखा गया था। यहां उन्हें यह डाइट दी जाती थी, जिसमें विटामिन्स और मिनरल्स शामिल होते थे।

- डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स कहना था कि तकनीकी रूप से देखा जाए तो वे भूख हड़ताल पर रही ही नहीं, क्योंकि उन्हें नाक के जरिए रिच डाइट दी जा रही थी।

- हालांकि, इरोम की इस भूख हड़ताल को दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल कहा जा रहा है।

- जेएनआईएमएस के एक डॉक्टर के मुताबिक, यह डाइट अमीरों द्वारा ली जाने वाली डाइट के समान है, जिसमें भरपूर विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं।

- मंगलवार की दोपहर तक नली के जरिए डाइट देने के लिए उनकी डयूटी में करीब 40 लोग तैनात थे। इऩमें जेएनआईएमएस के 5 डॉक्टर, 12 नर्स और इम्फाल जेल के दो मेडिकल सुपरवाइजर और बाकी पुलिसकर्मी।

- बता दें कि सुसाइड की कोशिश में भले ही इरोम को अरेस्ट कर इम्फाल सेंट्रल जेल भेजा गया, लेकिन उन्होंने 5,757 दिन हॉस्पिटल में ही बिताए।

- हॉस्पिटल में उनके लिए अलग से एक रूम था।

- भूख हड़ताल खत्म करने के बाद इरोम के रहने के लिए 7 घरों और एक मेकशिफ्ट कैम्प का ऑप्शन है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि वे अभी भी हॉस्पिटल के इसी रूम में रहेंगी।

डॉक्टर कैसे ख्याल रखते थे इरोम का

- जेएनआईएमएस के पूर्व हेड ने 'एचटी' को बताया- "हमें इरोम के वजन (51 किग्रा) को मेंटेन रखने के लिए न्यूट्रिशियन के डोज को बैलेंस रखना होता था।"

- "हम लगातार उसके ब्लड, स्टूल और यूरिन की जांच करते थे और हार्टबीट पर नजर रखने के लिए ईसीजी करते थे।"

- "आमतौर पर वह सहयोग करती थी, लेकिन जब मूड बिगड़ जाए तो संभालना मुश्किल हो जाता था।"

- "इसके अलावा उनकी रूटीन में योगा और वॉक भी शामिल था।"