चीन-पाकिस्तान को लगा झटका, भारत-ईरान मिलकर आज चाबहार पोर्ट की करेंगे शुरुआत

नई दिल्ली ( 3 दिसंबर ): भारत ने चाबहार पोर्ट के जरिए चीन और पाकिस्तान को करारा झटका दिया है। चीन की वन बेल्ट वन रोड (OBOR) को चाबहार पोर्ट करारा जवाब है। इससे भारत की सेंट्रल एशियाई देशों (कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान), रूस और यूरोप तक पहुंच हो जाएगी।

ईरान के राष्ट्रपति रविवार को चाबहार पोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान भारतीय प्रतिनिधि भी वहां मौजूद रहेंगे। इस बंदरगाह के जरिए भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच नए रणनीतिक ट्रांजिट रूट की शुरुआत होगी। आपको बताते हैं ऐसी वजहें जिनकी वजह से भारत के लिए यह बंदरगाह बेहद अहम है।

बता दें कि चीन, पाक के ग्वादर पोर्ट से शिनजियांग तक चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) बना रहा है, जो पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से गुजरेगा। ये कॉरिडोर चीन के OBOR प्रोजेक्ट का ही हिस्सा है। भारत, CPEC को लेकर अपना विरोध जता चुका है। यह पोर्ट ईरान के दक्षिण पूर्व सिस्तान बलूचिस्तान प्रॉविंस में है।

-इस बंदरगाह के जरिए भारत अब बिना पाकिस्तान गए ही अफगानिस्तान और फिर उससे आगे रूस और यूरोप से जुड़ सकेगा। अभी तक भारत को अफगानिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान होकर जाना पड़ता था। 

-कांडला एवं चाबहार बंदरगाह के बीच दूरी, नई दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी से भी कम है। इसलिए इस समझौते से भारत पहले वस्तुएं ईरान तक तेजी से पहुंचाने और फिर नए रेल एवं सड़क मार्ग के जरिए अफगानिस्तान ले जाने में मदद मिलेगी। इस बंदरगाह के जरिए ट्रांसपोर्ट लागत और समय में कमी आएगी। 

-ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलुचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक तौर पर उपयोगी है। यह फारस की खाड़ी के बाहर है और भारत के पश्चिम तट पर स्थित है और भारत के पश्चित तट से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। 

-चाबहार पोर्ट का एक महत्व यह भी है कि यह पाकिस्तान में चीन द्वारा चलने वाले ग्वादर पोर्ट से करीब 100 किलोमीटर ही दूर है। चीन अपने 46 अरब डॉलर के के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे कार्यक्रम के तहत ही इस पोर्ट को बनवा रहा है। चीन इस पोर्ट के जरिए एशिया में नए व्यापार और परिवहन मार्ग खोलना चाहता है। 

-ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह बंदरगाह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए मध्य एशियाई देश ओमान और हिंद महासागर के रास्ते दुनिया के दूसरे देशों से जुड़ सकेंगे। 

-चाबहार बंदरगाह सहित अफगान की सीमा तक सड़क और रेलवे का विकास होने से अफगानिस्तान और पूरे मध्य एशिया में भारत की पहुंच सुनिश्चित