2015 : ईरान में 977 और पाक में 320 को फांसी, सऊदी अरब में 158 लोगों का सिर कलम

नई दिल्ली (6 अप्रैल) :  पिछले 25 साल में 2015 में दुनिया में सबसे ज़्यादा सज़ा-ए-मौत दी गईं। ऐसा इस वजह से हुआ क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और पाकिस्तान में मौत की सज़ा देने का आकंड़ा बीते साल बहुत ऊंचा रहा।

एक नई रिसर्च के मुताबिक 2015 में 1,634 लोगों को सज़ा-ए-मौत दी गई। ये आंकड़ा 2014 की तुलना में 54 फीसदी अधिक था। एमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से मौत की सज़ा पर सालाना वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक 1989 के बाद ये किसी साल में दी गई सबसे अधिक मौत की सज़ा हैं। इसमें चीन के आंकड़ें शामिल नहीं हैं। जहां समझा जाता है कि हर साल सैकड़ों लोगों को गुपचुप ढंग से मौत की सज़ा दी जाती है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक ईरान, सऊदी अरब और पाकिस्तान में जिस तरह मौत की सज़ाओं में तेज़ी के साथ बढ़ोतरी हुई है वो चिंताजनक है। ईरान में 2015 में कम से कम 977 लोगों को मौत की सज़ा दी गई। इनमें अधिकतर नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में पकड़े गए लोग थे। इनमें से कम से कम 4 लोग ऐसे थे जो अपराध करने के वक्त 18 साल की उम्र से नीचे थे।

पाकिस्तान में दिसंबर 2014 में फांसी से रोक हटाए जाने के बाद 2015 में 320 लोगों को सज़ा-ए-मौत दी गई। सऊदी अरब दुनिया में अकेला देश है जहां सिर कलम कर मौत की सज़ा दी जाती है। 2015 में सऊदी अरब में 158 लोगों को मौत की सज़ा दी गई।

2016 में भी मौत की सज़ा देने में कमी नहीं आई है। पिछले सप्ताह द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब में इस साल 82 लोगों को मौत की सज़ा दी जा चुकी है। अगर यही सूरत आगे भी जारी रही तो सऊदी अरब में इस साल ये आंकड़ा 2015 की तुलना में दुगना हो जाएगा।