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नई दिल्ली(23 मार्च): 1 अप्रैल से शुरू हो रही अगली तिमाही में स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। 1 जनवरी के बाद 10 साल के सरकारी बॉन्ड की एवरेज यील्ड 7.5 पर्सेंट रही है।  इसका मतलब यह है कि पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) और दूसरी स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर ब्याज दरों में 0.15-0.20 पर्सेंट की बढ़ोतरी हो सकती है।

- स्मॉल सेविंग्स पर श्यामला गोपीनाथ समिति के फॉर्मूले के मुताबिक, पीपीएफ का रेट 1 अप्रैल से 0.25 पर्सेंट बढ़कर 7.75 पर्सेंट हो सकता है। सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम पर भी ब्याज दर 0.20 पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ 8.5 पर्सेंट हो सकती है। इस स्कीम की ब्याज दरों में दिसंबर तिमाही में कटौती नहीं हुई थी, जब दूसरी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स पर रिटर्न घटाया गया था। 1 अप्रैल से शुरू होने वाली तिमाही में सुकन्या समृद्धि योजना की दरों को भी 0.15 पर्सेंट बढ़ाकर 8.25 पर्सेंट किया जा सकता है। 

- गोपीनाथ समिति ने 2011 में स्मॉल सेविंग रेट्स को सरकारी बॉन्ड यील्ड से जोड़ने का सुझाव दिया था। उसने कहा था कि उसी तरह की मच्योरिटी वाली योजनाओं की ब्याज दरों को बॉन्ड यील्ड के मुकाबले 0.25-1 पर्सेंट तक अधिक होना चाहिए। समिति ने इन योजनाओं की ब्याज दरों में हर दो साल पर बदलाव का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने दो साल पहले इसमें हर तिमाही बदलाव करने का फैसला किया। 

- एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोपीनाथ समिति की सिफारिशों पर पूरी तरह अमल नहीं हो रहा है। दिसंबर 2017 तिमाही में स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की दरों में 0.20 पर्सेंट की कटौती की गई थी, जबकि उस क्वॉर्टर में 10 साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड का एवरेज इससे पिछली तिमाही से 0.45 पर्सेंट अधिक था। दिसंबर तिमाही में पीपीएफ रेट 7.8 पर्सेंट था, जबकि 10 साल की बॉन्ड यील्ड का एवरेज पिछले तीन महीनों में 6.52 पर्सेंट रहा था। ऐनालिस्टों का यह भी कहना है कि सरकारी बॉन्ड यील्ड में और बढ़ोतरी हो सकती है। 

- डीबीएस बैंक की इंडिया इकनॉमिस्ट राधिका राव और बैंक की रेट स्ट्रैटेजिस्ट यूजीन ल्यू ने कहा, ‘नए वित्त वर्ष में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है। तब तक सरकार की उधारी योजना स्पष्ट हो जाएगी और फिस्कल कॉस्ट का भी यील्ड पर असर पड़ चुका होगा।’ पिछले एक महीने में कई बैंकों ने डिपॉजिट रेट्स में बढ़ोतरी की है। एसबीआई ने टर्म डिपॉजिट रेट्स में 1 मार्च से 0.10-0.75 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद दूसरों बैंकों ने भी ऐसा कदम उठाया था।