जोधपुर: सेक्स रैकेट के लिए ऐसे होता था लड़कियों का सौदा, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान

नई दिल्ली (13 सितंबर): तीन साल की बच्ची के अपहरण के पीछे बंगाल से राजस्थान बॉर्डर तक मानव तस्करी के बड़े कारोबार का खुलासा हो रहा है। एक गुप्त कोठरी में बंद दो नाबालिग की बरामदगी से सामने आया सच एक बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा कर रहा है। जिसके तार बंगाल के लक्ष्मीपुर गांव से जुड़े हैं। जो एक नदी के पास और बांग्लादेश से महज 20 किमी दूर है, वहीं से पूरे देश में मासूम बच्चियों की तस्करी की जा रही है। 

8 महीने में 35 लाख रुपए कमाए इस गांव में गिरोह के सरगना का साम्राज्य फैला है जो बांग्लादेश से 5 से 7 हजार तक में मासूम लड़कियों की खरीद करता है, फिर सीमा पर तैनात जवानों की मिलीभगत से बॉर्डर पार करवा पहले कोलकाता लाता है। फिर उन्हें अनैतिक कार्यों में धकेलने के लिए देश भर में भेजता है। 

डीसीपी ईस्ट विनीत कुमार ने बताया कि गिरोह की सभी बड़े शहरों में चेन फैली है , इसे चलाने वाले मास्टर माइंड सुजॉय बिश्वास को बांग्लादेश बॉर्डर से पकड़ कर जोधपुर ला रहे हैं। उसके बैंक खातों की छानबीन कर देश के शहरों में अनैतिक कार्याें के लिए बंधक बनाई बच्चियों को मुक्त कराने का प्रयास करेंगे। 

पकड़ी गई बच्चियों को नंदिनी नाम की महिला ने समझा रखा था कि जब भी पकड़े जाएं तो बताना कि राजीव रंजन लेकर आया है, लेकिन राजीव रंजन नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं। नंदिनी के घर की तलाशी में फर्जी आईडी और बैंक में पैसा जमा कराने की पर्चियां मिली। जिस खाते में पैसा जमा हो रहा था, वह सुजॉय बिश्वास का खाता था। 

इस खाते की जांच की तो इसमें पिछले 8 माह में करीब 35 लाख रुपए जमा होना पाया गया। यह पैसा जयपुर , मुंबई , पुणे आदि कई शहरों से जमा हो रहा था और विड्रा बंगाल के विभिन्न एटीएम से हो रहा है। तब एक टीम वहां भेजी गई और सुजॉय को पकड़ा गया। विश्वास को बांग्लादेश बॉर्डर से पकड़ कर जोधपुर ला रहे हैं।