अमेरिका के दुश्मन फिदेल कास्त्रो के बारे में जानिए बड़ी बातें

नई दिल्ली(26 नवंबर):क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका जन्म 1926 में क्यूबा के फिदेल अलेजांद्रो कास्त्रो परिवार में हुआ था जो काफ़ी समृद्ध माना जाता था। फ़रवरी 1959 से दिसम्बर 1976 तक वे क्यूबा के प्रधानमंत्री और फिर क्यूबा की राज्य परिषद के अध्यक्ष (राष्ट्रपति) रहे, उन्होंने फरवरी 2008 में अपने पद से इस्तीफा दिया।

कौन थे फिदेल कास्त्रो

- क्यूबा का राष्ट्रपति फुल्गेन्सियो बतिस्ता अमेरिकी पिट्‌ठू था। उसने अपने शासनकाल में (1951-1959) तक अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखा और आम जनता को नजरअंदाज किया। 

- लोग भ्रष्टाचार, असमानता और अन्य तरह की परेशानियों से जूझ रहे थे। लगातार बढ़ते रोष के वजह से क्यूबा में क्रांति ने जन्म लिया। इसकी अगुआई फिदेल कास्त्रो और चे ग्वारा कर रहे थे। 

- 26 जुलाई, 1953 को क्यूबा क्रांति की शुरुआत हुई। दिसंबर 1958 को राष्ट्रपति बतिस्ता का तख्तापलट कर दिया गया। कास्त्रो ने क्यूबा का राष्ट्रपति बनते ही अमेरिकी विरोधी रुख अपनाया। वहीं, अमेरिका ने भी क्यूबा पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए।

- क्रांति से पहले वह तानाशाह के खिलाफ 1952 के चुनाव में खड़े हुए। लेकिन इससे पहले लोग वोट कर पाते, वोटिंग खत्म कर दी गई। 

- जनक्रांति शुरू करने के इरादे से 26 जुलाई को फिदेल कास्त्रो ने अपने 100 साथियों के साथ सैंटियागो डी क्यूबा में सैनिक बैरक पर हमला किया, लेकिन नाकाम रहे। इस हमले के बाद फिदेल कास्त्रो और उनके भाई राउल बच तो गए, लेकिन अन्य लोगों को जेल में डाल दिया गया।

- फिदेल कास्त्रो ने बतिस्ता शासन के खिलाफ अभियान बंद नहीं किया। यह अभियान उन्होंने मैक्सिको में निर्वासित जीवन जीते हुए चलाया। वहां उन्होंने एक छापामार संगठन बनाया। इसे '26 जुलाई मूवमेंट' नाम दिया गया। कास्त्रो के क्रांतिकारी आदर्शों को क्यूबा में काफी समर्थन मिला। 

- 1959 में उनके संगठन ने बतिस्ता शासन का तख्तापलट दिया और प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बने। देश के राष्ट्रपति उनके भाई राउल कास्त्रो हैं।