FACTS: हेलिकॉप्टर से कूदकर किसने फहराया था उत्तरी ध्रुव पर तिरंगा?

नई दिल्ली (25 जनवरी): गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम आपको बता रहे हैं अपने राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां...

> पहला ध्‍वज 7 अगस्‍त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था। इस ध्‍वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।  > राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में एक ऐसा लघु तिरंगा है, जिसे सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से जड़ कर बनाया गया है।  > माउंट एवरेस्ट पर पहली बार तिरंगे को यूनियन जैक तथा नेपाली राष्ट्रीय ध्वज के साथ 1953 में फहराया गया, जब शेरपा तेनजिंग और एडमंड हिलेरी ने माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की।  > 21 अप्रैल 1996 को स्क्वाड्रन लीडर संजय थापर ने एम. आई.-8 हेलिकॉप्टर से 10000 फीट की ऊंचाई से कूदकर पहली बार तिरंगा उत्तरी ध्रुव पर फहराया। > तिरंगे को किसी रूमाल और किसी नैपकिन पर प्रिंट नहीं किया जा सकता है। > तिरंगा न तो जमीन से और न ही पानी से टच होना चाहिए। > किसी गाड़ी, किश्ती और हवाई जहाज के ऊपरी और आखिरी हिस्से पर तिरंगा नहीं लगा होना चाहिए। > अगर तिरंगे को किसी विदेशी झंड के साथ फरहाने की आवश्यकता पड़े तो तिरंगा दाई तरफ होना चाहिए।

क्या होता है साइज तिरंगे के साइज को लेकर स्पष्ट नियम हैं। यह कुल मिलाकर 9 तरह के साइज का ही सकता है। सबसे बड़ा साइज 6300 गुणा 4200 और सबसे छोटा साइज 150 गुणा 100 एमएम का होता है। इसी प्रकार दूसरे नंबर का साइज 3600 गुणा 2400, तीसरा 2700 गुणा 1800, चौथा 1800 गुणा 1200, पांचवां 1350 गुणा 900, छठा 900 गुणा 600, सातवां 450 गुणा 300 और आठवां साइज 225 गुणा 150 एमएम का होता है।