PAK सांसदों ने सरकार से कहा-दूसरी ईस्ट इंडिया कंपनी न बन जाए चीनी कॉरिडोर

नई दिल्ली ( 19 अक्टूबर ) : पाकिस्तान के कई सांसदों ने अपनी सरकार को हिदायत दी है कि अगर देश के हितों की अनदेखी की गई तो चीन-पाक इकॉनोमिक कॉरिडोर (CPEC) दूसरी ईस्ट इंडिया कंपनी साबित हो सकता है। पाकिस्तान और चीन के बीच यह कॉरिडोर 46 अरब डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपए) की लागत से तैयार किया जा रहा है। यह कॉरिडोर ग्वॉदर पोर्ट से शुरू होकर पीओके से होता हुआ चीन जाएगा। भारत इस पर आपत्ति जता चुका है। 

चीन से दोस्ती पर नाज है…

सीनेटर ताहिर मशादी ने कहा, एक और ईस्ट इंडिया कंपनी आने वाली है। राष्ट्रीय हितों का बचाव नहीं किया जा रहा। हमें पाकिस्तान-चीन की दोस्ती पर नाज है। लेकिन देश के हित सबसे पहले होने चाहिए। ताहिर प्लानिंग एंड डेवलपमेंट की सीनेट स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने यह बात तब कही जब कमेटी के कुछ मेंबर्स ने इस बात पर फिक्र जताई कि सरकार लोगों के अधिकारों और हितों की अनदेखी कर रही है। बता दें कि 'द ईस्ट इंडिया कंपनी' ब्रिटेन के कारोबारी मिशन का नाम था जो भारत में भेजा गया था। सबकॉन्टिनेंट में ब्रिटिश हुकूमत की मौजूदगी का ये पहला कदम था। उस वक्त भारत पर मुगलों का शासन था जिन्हें हटाकर ब्रिटेन ने अपना राज स्थापित किया।

कमेटी के मेंबर्स ने CPEC पर कई शक जाहिर किए। उनका कहना था कि कॉरिडोर से जुड़े पावर प्लांट के लिए बिजली के दाम चीनियों की ओर से तय किए जा रहे हैं। बैठक में नवाज सरकार के 3 मेबर्स में से सिर्फ एक ही मौजूद रहा, लिहाजा कमेटी के मेंबर्स को ज्यादातर सवालों के जवाब नहीं मिल सके। यहां तक कि नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन से जुड़े मेंबर सईदुल हसन मांदोखाइल ने भी कमेटी के चेयरमैन की शिकायत को सही ठहराया।

CPEC में चीनीइन्वेस्टमेंट की जगह लोकल फंडिंग... मीटिंग में बताया गया कि CPEC का बड़ा हिस्सा चीनी इन्वेस्टमेंट की जगह लोकल फंडिंग पर बेस्ड है। कमेटी के चेयरमैन मशहादी ने कहा, ये हमारे लिए बहुत नुकसानदेह होगा कि सारा बोझ हम उठाएं। ये प्रोजेक्ट राष्ट्रीय विकास होगा या राष्ट्रीय आपदा? चीन से जो भी कर्ज लिया जाएगा वह पाकिस्तान की गरीब अवाम को चुकाना होगा।

बलूचिस्तान के लिए कोई प्लान नहीं... सांसद खोखर ने कहा कि ग्वादर में जो इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है उसका बेनिफिट सिर्फ चीन और पाकिस्तान में पंजाब की सरकारों को मिलेगा। इसका यहां के लोगों को कोई बेनिफिट नहीं होगा। खोखर के मुताबिक CPEC के तहत बलूचिस्तान के लिए कोई बिजली या रेलवे प्रोजेक्ट प्लान नहीं किया गया है।