इराक में 13 साल में सबसे तीखी जंग, 40 हजार सैनिकों ने आईएसआईएस के गढ़ मोसूल पर बोला जबरदस्त हमला

नई दिल्ली ( 18 अक्टूबर ): इराकी सेना ने आईएस के चंगुल से मोसुल को छुड़ाने के लिए जबरदस्त जंग छेड़ दी है। करीब 40 हजार सैनिक शहर की तरफ बढ़ रहे हैं। शहर के ईस्ट, साउथ और साउथ-ईस्ट इलाके के 20 गांव आतंकियों से छीन लिए हैं। इस आर्मी ऑपरेशन में इराकी सेना, शिया मिलिशिया गुट, कुर्द लड़ाके और नाटो ग्रुप शामिल हैं। मोसुल में पिछले 13 साल में यह आर्मी की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 2003 में अमेरिकी आर्मी ने सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए जंग छेड़ी थी। आईएस ने जासूसी के शक में 58 साथियों को डुबोकर मार डाला। 

अगर मोसुल शहर से भी आईएस का कब्जा हट जाता है, तो इराक के 10 फीसदी हिस्से पर ही इसका प्रभाव रह जाएगा। हालांकि, सीरिया में आईएस का प्रभाव अभी भी बरकरार है। इस बीच, आईएस ने जासूसी करने के आरोप में 58 साथियों को डुबोकर मार डाला। फिर इन्हें जला दिया था। बता दें कि मोसुल इराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इस पर कंट्रोल करने के लिए हमले की योजना कई महीने से बनाई जा रही थी। इस शहर में अभी भी आईएस के 7 हजार आतंकी मौजूद हैं।

इराक के पीएम ने कहा, फतह का समय आ गया है। पीएम हैदर अल अबादी ने सोमवार को सरकारी टेलीविजन पर कहा, "आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से मोसुल शहर को छुड़ाने के लिए सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई है।" "फतह का समय आ गया है और मोसुल को आईएस के कब्जे से मुक्त कराने के लिए हमने कोशिशें शुरू कर दी हैं। अब आईएस की हिंसा और आतंकवाद से निजात मिलेगी।"

इराकी सेना पिछले डेढ़ साल में तिकरित, रामादी और फजुल्लाह को आईएस से मुक्त करा चुकी है। क्रूड ऑयल से रिच मोसुल पर आईएस ने 2014 में कब्जा किया था। बगदादी ने इराक में इसे अपनी राजधानी बनाया था। इसके बाद 10 लाख लोगों को शहर छोड़ना पड़ा था। यहीं से उसने फजुल्लाह और तिकरित जैसे अहम शहरों पर कब्जा किया था।

आईएस अपने आखिरी गढ़ को बचाने के लिए केमिकल प्लान्ट में धमाका कर सकता है। इसके अलावा वह आत्मघाती दस्ता, कार ब्लास्ट, डायनामाइट ब्लास्ट जैसे हथकंडे अपना सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आतंकियों ने सड़कों और अहम ठिकानों पर बारूदी सुरंगों का जाल बिछा रखा है।