डायबटिज के मरीजों के लिए बुरी खबर, नहीं मिलेगी इंसुलिन

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (19 दिसंबर): अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबजिट का मरीज है और वह इंसुलिन का प्रयोग करता है तो यह खबर उसको झटका दे सकती है। क्योंकि हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार, देश में डायबिटिक रोगियों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। यही नहीं वैश्विक स्‍तर पर इस बीमारी के करीब 40.56 करोड़ रोगी हैं। 2030 तक टाइप 2 डायबिटिक रोगियों की संख्‍या बढ़कर 51 करोड़ के आसपास पहुंच जाएगी, जिसके बाद मरीजों को इंसुलिन मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

टाइप 2 डायबिटीज में रोगियों को कुछ साल बाद इंसुलिन की मदद लेनी पड़ती है, लेकिन बुरी खबर यह है कि जैसे-जैसे रोगियों की संख्‍या बढ़ेगी इंसुलिन कम ही मरीजों को उपलब्‍ध हो पाएगी। दूसरा पहलू यह भी है कि इंसुलिन की मौजूदा कीमत ही दवा के मुकाबले ज्‍यादा और इसकी मांग बढ़ने पर दाम और चढ़ेंगे।

कब लेनी पड़ती है इंसुलिन

डायबिटिक रोगियों को पैक्रियाज में इंसुलिन घटने के कारण इसे लेना पड़ता है। शरीर में प्रचुर मात्रा में इंसुलिन की खुराक देने के लिए रोगी को इसे दिया जाता है। अगर रोगी डायबिटीज को कंट्रोल में नहीं रखता तो इससे उसका हार्ट, किडनी, आंख और नर्वस सिस्‍टम प्रभावित हो सकता है।

अमेरिका की स्‍टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया है कि करीब 3.3 करोड़ रोगियों को इंसुलिन का एक्‍सेस नहीं है। इसका बड़ा कारण बाजार में इंसुलिन की उपलब्‍धता में कमी और उसका दवा के मुकाबले कहीं ज्‍यादा महंगा होना है। 2030 तक इंसुलिन के इस्‍तेमाल में काफी बढ़ोतरी होगी। 2018 में यह संख्‍या 51.6 करोड़ 1000 IU वायल प्रति वर्ष थी जो 2030 तक बढ़कर 63.3 करोड़ प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है।

इंसुलिन करीब 100 साल पुरानी दवा है, लेकिन इसकी कीमत कभी नहीं गिरी। डॉक्‍टरों के मुताबिक़, 1554 अरब रुपए के ग्‍लोबल इंसुलिन बाजार का 99% हिस्सा 3 मल्टीनेशनल कंपनियों- नोवो नोरडिस्क, इलि लिली एंड कंपनी और सनोफी के पास है यानि इन 3 कंपनियों के पास 96 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। ये 3 कंपनियां इंसुलिन की आपूर्ति करती हैं।