यह है स्मृति के 'डिमोशन' की इनसाइड स्टोरी

अमित कुमार, नई दिल्ली (6 जुलाई): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मृति ईरानी से शिक्षा मंत्रालय छीन कर उन्हें कपड़ा थमा दिया। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि स्मृति को यूपी में चेहरा बनाने की तैयारी चल रही है, लेकिन न्यूज़ 24 को मिली जानकारी के मुताबिक, स्मृति को यूपी भेजने का कोई प्लान नहीं है।

स्मृति ईरानी ने कपड़ा मंत्रालय में काम-काज संभाल लिया है। राजनीतिक गलियारों से लेकर मीडिया तक में चर्चा गर्म है कि स्मृति को यूपी भेजने की तैयारी है, इसीलिए उन्हें हल्का काम यानी शिक्षा की जगह कपड़ा मंत्रालय सौंप गया है। न्यूज़ 24 को बीजेपी से उच्च सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्मृति को यूपी भेजने का कोई प्लान नहीं है। मतलब, बीजेपी स्मृति को यूपी विधानसभा चुनाव में चेहरा नहीं बना रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्रालय से हटाया क्यों गया?

न्यूज़ 24 को मिली जानकारी के मुताबिक:

- बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह स्मृति ईरानी के काम-काज से नाराज थे - पार्टी के बड़े नेता उनकी बॉडी लैंग्वेज यानी तौर-तरीकों से खुश नहीं थे - स्मृति के शिक्षा मंत्री बनने के बाद से विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे थे - स्मृति के डिग्री विवाद में भी पार्टी को बहुत सफाई देनी पड़ी थी - रोहित वैमुला और जेएनयू कांड में सरकार की बहुत फजीहत हुई - AMU और IIT विवाद की वजह से भी सरकार की किरकिरी हुई - DU में चार साल के कोर्स को लेकर भी जमकर बवाल हुआ - स्मृति ईरानी बात-बात में किसी से भी उलझ जाती थी

न्यूज़ 24 को मिली जानकारी के मुताबिक, स्मृति ईरानी के तौर-तरीकों से मानव संसाधन विभाग के अफसर भी नाराज थे। खुद, स्मृति के दौर में नियुक्त किए गए कई यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलरों ने प्रधानमंत्री से उनकी शिकायत की। संघ तक भी स्मृति की शिकायतें पहुंच रही थीं। लेकिन ओवर कॉनफिडेंट स्मृति को हवा ही नहीं लगी कि उनके नीचे से जमीन खिसकती जा रही है। अब भले ही स्मृति शिक्षा मंत्री रहते अपने शानदार कामों की लिस्ट गिना रही हों।

स्मृति ईरानी के तौर-तरीकों से RSS भी नाराज चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी आलाकमान से उन्हें संभलने की बहुत पहले नसीहत दी गयी थी, लेकिन वो अपनी धुन में चलती रही। जानकारी के मुताबिक, स्मृति ईरानी को बहुत पहले ही हटाने की तैयारी हो चुकी थी। लेकिन ये सोचकर कोई बड़ा फैसला नहीं लिया कि विपक्ष को बैठे-बिठाए मोदी सरकार पर हमले का मौका मिल जाता। ऐसे में पीएम ने सही समय का इंतजार किया और स्मृति को कपड़ा मंत्रालय में बैठा दिया। प्रकाश जावडेकर को शिक्षा मंत्रालय जैसा अहम महकमा देकर अपने साथी मंत्रियों को भी पीएम ने सीधा संदेश दिया कि उन्हें विवाद वीर नहीं, परफॉर्म करने वाले मंत्री चाहिए।