शालिनी से बनी सलमा फिर भी ससुराल वालों ने नहीं दिया जिगर का टुकड़ा

नई दिल्ली (31 जनवरी): बेटे के जन्मदिन का तोहफा लेकर गई एक मां के आगे ससुराल वालों ने धर्म की दीवार खड़ी कर दी। मुस्लिम परिवार में प्रेम विवाह करके आई मां को उसके बच्चों से मिलाने की बजाय दुत्कार कर दरवाजा बंद कर लिया गया। काफी देर तक दरवाजे पर खड़ी होकर वह मिन्नतें करती रही, लेकिन ससुराल वालों का दिल नहीं पसीजा। आरोप है कि ससुराल वाले महिला के साथ मारपीट पर भी आमादा हो गए। महिला द्वारा 100 नंबर पर सूचना के बाद मौके पर पहुंची गोमतीनगर पुलिस उसे थाने ले आई। थाने में पूरी बात पता चलने के बाद दरोगा खुद उसे बेटे से मिलवाने लेकर गए।

गोमतीनगर के विनीतखंड की रहने वाली शालिनी ने 2006 में विनयखंड निवासी मोहम्मद सत्तार से प्रेम विवाह किया था। सत्तार के परिवारीजनों का विरोध देख वह धर्म परिवर्तन कर शालिनी से सलमा बेगम बन गई। बावजूद इसके सास, ससुर ने उसे अपनाने से इन्कार कर दिया। शालिनी के एक बेटा और तीन बेटियां हैं। पुलिस के अनुसार, तनाव के चलते गंभीर बीमारी के बाद 2015 में इलाज के दौरान सत्तार की मौत हो गई तो सलमा को घर से बाहर निकाल दिया गया। सास, ससुर ने तीनों औलादों को अपना खून बताकर उन्हें शालिनी को देने इनकार कर दिया।

शालिनी ने बताया कि घर से निकाले जाने के बाद वह पुलिस के पास पहुंची तो कोई मदद नहीं मिली। इस पर उसने महिला आयोग में बच्चों को दिलाने की गुहार लगाई। आयोग ने सास, ससुर को तलब किया तो वह कोर्ट चले गए। तब से वह लगातार बच्चों को पाने का हरसंभव प्रयास कर रही है। मंगलवार को 12 साल के बेटे अयान का जन्मदिन है। सोमवार को शालिनी बेटे के लिए खिलौने और कपड़े लेकर गई थी, लेकिन ससुराल वालों ने उसे भगा दिया। आरोप है कि सास और देवर ने उससे मारपीट भी की।  पूरी बात जानने के बाद एसएसआई खुद सलमा को लेकर ससुराल पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में बच्चों को बाहर बुलाया गया। मां को देखते ही तीनों बच्चे लिपट कर रोने लगे। दरोगा ने सास, ससुर से बातचीत की तो वे बच्चे शालिनी की सुपुर्दगी में देने से इनकार करते रहे। काफी देर बाद उन्होंने तीन साल की सबसे छोटी बेटी को शालिनी के सुपुर्द किया।