उत्तराखंड CM को सौंपी गई 'पुत्रजीवक बीज' की जांच रिपोर्ट, नतीजे रामदेव के 'पक्ष में नहीं'

नई दिल्ली (31 जनवरी): बाबा रामदेव की फार्मेसी की तरफ से उत्पादित की गई विवादित इन्फर्टीलिटी मेडिसिन के परीक्षण के लिए उत्तराखंड सरकार की तरफ से बनाई गई जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की है। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट के नतीजे योग गुरु के पक्ष में नहीं हैं।

गौरतलब है, पिछले साल राज्य सरकार ने बाबा रामदेव के आयुर्वेदिक उत्पाद 'पुत्रजीवक बीज' की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। इस उत्पाद पर कथित तौर पर पुरुष संतान पैदा होने का दावा करने का आरोप लगा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री के हरी झंडी दिखाए जाने के बाद यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। राज्य के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) ओम प्रकाश ने इसकी जानकारी दी है। ओम प्रकाश ने बताया, "पुत्रजीवक दवा पर जांच रिपोर्ट रामदेव के पक्ष में नहीं है। इसे मुख्यमंत्री हरीश रावत को सौंपा गया है।" हालांकि, उन्होंने ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया है।

बता दें, इस उत्पाद पर तब विवाद शुरू हो गया था जब 1 मई को जदयू के केसी त्यागी की अगुवाई में राज्यसभा सांसदों ने इस उत्पाद पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की थी। साथ ही उत्पादक पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की थी। इसपर केंद्र सरकार ने उत्तराखंड सरकार को मामले में जांच के आदेश करने के लिए कहा था। हालांकि, रामदेव ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। उन्होंने बताया था कि इस दवा से महिलाओं में नपुंसकता का इलाज करने में मदद मिलती है। साथ ही पुरुष संतान होने के दावों वाली रिपोर्ट्स को गलतफहमी पैदा करने वाला बताया था।

आयुष ड्रग कंट्रोलर पीडी चामौली की अगुवाई वाली समिति ने रामदेव को क्लीन चिट दे दी थी। उन्होंने इस दवा को प्राचीन आयुर्वेदिक किताबों और साहित्य के आधार पर बनाए जाने की बात कही थी। लेकिन, चामौली समिति की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने डीजी हेल्थ और राज्य के कानून विभाग को मामले में जांच करने के लिए कहा और अपनी रिपोर्ट पेश की है। जो रामदेव के खिलाफ बताई जा रही है।