पीएम मोदी के इस निर्णय से डर पाकिस्तान पहुंचा वर्ल्ड बैंक

इस्लामाबाद (28 सितंबर): उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद प्रधनामंत्री नरेंद्र मोदी हर तरह से पाकिस्तान के घेरने में लगे हैं। पीएम मोदी के सिंधु जल समझौते पर कड़े रुख से डरकर पाकिस्तान वर्ल्ड बैंक की शरण में चला गया है।

भारत की ओर से सिंधु जल समझौते को रद्द किए जाने की अटकलों के बीच पाकिस्तान के कुछ बड़े अधिकारी वर्ल्ड बैंक के पास पहुंचे। गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए सिंधु जल समझौते में वर्ल्ड बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

पाकिस्तान के न्यूज चैनल जियो न्यूज के मुताबिक पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल अश्तर औसफ अली की अगुवाई में पाकिस्तानी सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन में स्थित वर्ल्ड बैंक के मुख्यालय में सीनियर अफसरों से मिला। इस मुलाकात में पाकिस्तान द्वारा हाल ही में की गई गुजारिश को लेकर बातचीत हुई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत में भी गया है।

19 अगस्त को पाकिस्तान ने भारत से आधिकारिक तौर पर आग्रह किया था कि भारत द्वारा नीलम और चिनाब नदी पर किशनगंगा और हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट्स के निर्माण को लेकर लंबित विवादों को निपटाया जाए। सिंधु जल समझौते के आर्टिकल IX के अनुसार इस मामले को कोर्ट ऑफ आरबिट्रेशन में भेजा जाए।

समझौते ते तहत, कोर्ट ऑफ आरबिट्रेशन को स्थापित करने में वर्ल्ड बैंक की अहम भूमिका है। वर्ल्ड बैंक इसमें तीन जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में मदद करेगा, इन जजों को अंपायर कहा जाता है। वहीं दोनों देश दो मध्यस्थों की नियुक्ति करते हैं। वर्ल्ड बैंक से मिले पाकिस्तान के अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि जजों की नियुक्ति जल्द की जाए। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ल्ड बैंक ने समझौते के तहत वक्त पर अपनी जिम्मेदारी निभाने और निष्पक्ष रहने की बात कही है।