आज वाशिंगटन में होगा सिन्धु नदी जल को लेकर घमासान

नई दिल्ली(27 सितंबर):  सिंधु नदी जल बंटवारे को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच घमासान जारी रहने की संभावना है। मंगलवार को पाकिस्तान वाशिंगटन में जहां भारत पर गंभीर आरोप लगाने की तैयारी में है, वहीं भारत ने उसे आईना दिखाने की तैयारी की है। दोनों देशों के प्रतिनिधि वाशिंगटन में विश्वबैंक की मध्यस्थ में होने वाली पंचायत में हिस्सा लेने के लिए पहुंच चुके हैं।

- विदेश मंत्रालय और जल संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तान नदी जल के बंटवारे को लेकर लगातार अनर्गल आरोप लगा रहा है। विश्वबैंक की मध्यस्थता में 1960 में दोनों देशों के बीच सिन्धु नदी जल समझौता हुआ था। पाकिस्तान लगातार तकनीकी पक्ष का हवाला देकर आरोप लगाता है कि भारत उसके हिस्से का पूरा पानी नहीं छोड़ रहा है।

- इसके अलावा कुछ अन्य बिन्दुओं को आधार बनाकर उसने मामले में इंटरनेशनल आर्बिटरेशन में लाने के लिए जोर लगाया है। जबकि भारत का कहना है कि पाकिस्तान के सभी आरोप बेबुनियाद हैं। भारत ने कहीं भी समझौते की किसी शर्त का कोई उल्लंघन नहीं किया है। यहां तक कि भारत ने अपने हिस्से के पानी का भी भरपूर उपयोग नहीं किया और इसे पाकिस्तान जाने दिया है। भारत ने विश्वबैंक से अपील की है कि वह इसकी किसी निष्पक्ष संस्था से स्वतंत्र जांच करा सकता है।

आतंकवाद मुक्त होने पर ही होगी बैठक विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक भारत और पाकिस्तान ने सिन्धु नदी जल समझौते में पानी के बंटवारे, तकनीकी समस्याओं तथा अन्य के समाधान के लिए स्थायी सिन्धु नदी जल आयोग का गठन कर रखा है।

इसके लिए दोनों देशों ने सिन्धु नदी जल आयुक्त नियुक्त कर रखे हैं और आयुक्तों की हर छह महीने में एक बार भारत या फिर पाकिस्तान में बैठक होती है। अभी तक दोनों देशों के आयुक्त 112 बार बैठक कर चुके हैं, लेकिन अब अगली बैठक सीमापार से प्रायोजित आतंकवाद के बंद होने के बाद ही होगी।

भारत ने सिन्धु नदी जल समझौते को लेकर बांध बनाने, बिजली परियोजनाओं और खेती-बारी के लिए नहर विकसित करने का निर्णय  सोच-समझकर लिया है। इसके बाबत चीन की प्रतिक्रिया पूछने पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इसमें चीन का क्या काम? मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार चीन का सिन्धु नदी के जल से कोई लेना-देना नहीं है।

इसे ब्रह्मपुत्र नदी से जोडऩे पर अधिकारियों ने कहा कि चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना ही रहा है। उसका यहां क्या लेना-देना।