...जानिए पानी से कैसे जला पाकिस्तान! पीएम मोदी के ऐलान के बाद क्यों खौफ में हैं नवाज शरीफ

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (17 दिसंबर): सिंधु जल समझौते पर पीएम मोदी के कड़े रूख के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। बौखलाहट में पाकिस्तान ने भारत को एक बार फिर धमकी दी है कि वह समझौते में कोई भी बदलाव बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विशेष सहयोगी तारिख फातमी के हवाले से छापा है कि पाकिस्तान सिंधु जल समझौते के मौजूदा प्रावधानों में किसी तरह के बदलाव को स्वीकार नहीं करेगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान का यह बयान भारतीय विदेश मंत्रालय के उस बयान के एक दिन बाद सामने आया है जिसमें कहा गया था कि समझौते में मतभेदों को द्विपक्षिय बातचीत से सुलझाया जा सकता है। दरअसल पाकिस्तान को डर है कि भारत बातचीत का बहाने अपने दोनों प्रोजेक्ट किशनगंगा (330 मेगावॉट) और रातले (850 मेगावॉट)को पूरा कर लेगा। ये दोनों परियोजनाएं सिंधु की सहायक नदियों किशनगंगा और चेनाब पर चल रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कश्मीर घाटी को 1180 मेगावॉट बिजली और साथ में सिंचाई के लिए पानी मिल पाएगा। पाकिस्तान को आपत्ति है कि इन प्रोजेक्टों से उसके हिस्से का पानी रूक जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पंजाब के बठिंडा से 25 नवंबर को पाकिस्तान को सख्त लहजे में संदेश दिया था कि "भारत के हक का पानी पाकिस्‍तान में नहीं जाने दिया जाएगा"। इस बयान को पाकिस्तान खतरे की घंटी मान रहा है। सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनदायनी है अगर भारत सिंधु जल समझौता तोड़ देता है तो पाकिस्तान पानी के लिए तरस जाएगा। पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत रेगिस्तान बन जाएगा। आइए जानते हैं आखिर क्या है सिंधु जल समझौता-

क्या है सिंधु जल समझौता...

- सिंधु जल समझौता 19 सितंबर 1960 में छह नदियों के पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था।

 - समझौता पर भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाक राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।

 - सिंधु नदी संधि विश्व के इतिहास का सबसे उदार जल बंटवारा माना जाता है।

 - अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति ने 2011 में इस संधि को दुनिया की सफलतम संधि करार दिया था।

 - समझौते के तहत छह नदियां आती हैं सिंधु, चेनाब, झेलम ब्यास, रावी और सतलुज।

 - इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है।

 - समझौते के अंतर्गत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया।

 - सतलुज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया।

 - भारत पूर्वी नदियों सतलुज, ब्यास और रावी के पानी को पूर्ण रूप से इस्तेमाल कर सकता है।

 - जबकि पश्चिमी नदियों झेलम, चेनाब और सिंधु का पानी किसी रुकावट पाकिस्तान को देना स्वीकार किया।

 - लेकिन साथ ही भारत पश्चिमी नदियों का पानी बिजली, सिचांई और भंडारण के लिए इस्तेमाल कर सकता है।

 - समझौते के अंतर्गत एक स्थायी सिंधु आयोग की स्थापना की गई, जिसमें दोनो देशों ने कमिश्नर नियुक्त किए।

 - अगर कोई देश किसी प्रोजेक्ट पर काम करता है और दूसरे देश को उसकी जानकारी देनी होगी।

 - अगर किसी देश को कोई आपत्ति है तो दोनों देशों के कमिश्नर बैठक कर उसका हल निकालेंगे।

 - अगर आयोग समस्या का हल नहीं ढूंढ़ पाती हैं तो सरकारें उसे सुलझाने की कोशिश करेंगी।

 - अगल मामला नहीं सुलझता तो कोर्ट ऑफ आर्ब्रिट्रेशन में जाने का भी रास्ता खुला है।

पाकिस्तान को क्या फायदा मिल रहा है...

 - इन छह नदियों के पानी से पाकिस्तान में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

 - इन्हीं नदियों की वजह से पाकिस्तान का उत्तरी और पश्चिमी भाग हरा-भरा है।

 - इन्हीं नदियों ने पाकिस्तान के 65 फीसदी भू-भाग इस्लामाबाद से कराची तक को उपजाऊ बना रखा है।

 - इन्हीं नदियों बेसिन में पाकिस्तान का 70 फीसदी अनाज उगता है।

 - 2.6 करोड़ एकड़ कृषि भूमि सिंचाई के लिए इन नदियों के जल पर निर्भर है।

 - इन्हीं नदियों बेसिन में पाकिस्तान की 36 फीसदी बिजली का उत्पादन होता है।

 - यूनेसको के सर्वे के अनुसार 20 करोड़ की आबादी में से 15 करोड़ लोग सिंधु नदी बेसिन में रहते हैं।

 - यहीं नहीं पाकिस्तान के दोनों बड़े न्यूक्लियर प्लांट चश्मा और खुशाब भी इन्हीं नदियों के किनारे पर लगे हैं।

 - चश्मा के चारों न्यूक्लियर प्लांट पंजाब के मिंयावली में सिंधु नदी के किनारे लगे हैं।

 - ऐसे ही खुशाब के चारों न्यूक्लियर प्लांट पंजाब के सरगोधा में चेनाब नदी के किनारे लगे हैं।

पाकिस्तान पर क्या होगा असर...

 - अगर यह समझौता भारत रद्द कर देता है तो पाकिस्तान का 65 फीसदी भू-भाग बंजर हो जाएगा।

 - पाकिस्तान की दो तिहाई आबादी पानी के लिए त्राहिमाम-त्राहिमान करने लगेगी।

 - सिंधु और उसकी सहायक पांच नदियां पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से की प्यास बुझाती हैं।

 - पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने भी माना है कि सिंधु के पानी के बगैर देश का एक हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा।

 - सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी से पाकिस्तान में 36 फीसदी बिजली बनाई जाती है।

 - अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में बिजली को लेकर हाहाकार मच जाएगा।

 - इसके अलावा इन तीनों नदियों से सिंचाई भी की जाती है, 70 फीसदी अनाज उगता है।

 - अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में आकाल के हालात पैदा हो जाएंगे।

 - यही नहीं पाकिस्तान के दोनों बड़े न्यूक्लियर प्लांट चश्मा और खुशाब ठप पड़ जाएंगे।

 - कर्ज में गले तक डूबे पाकिस्तान के लिए यग झटका सहन करना आसान नहीं है।

बठिंडा रैली में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान- रोक देंगे पाकिस्तान का पानी

 - सिंधु जल समझौते में हिंदुस्तान के हक का पानी पाकिस्तान में बह जाता है।

 - पाकिस्तान पानी चला जाता है और अबतक की केंद्र सरकारें सोती रहीं।

 - पंजाब के किसानों को पानी मिल जाए तो वे मिट्टी से सोना निकाल सकते हैं।

 - पीएम ने कहा अब वो बूंद-बूंद पानी रोक कर मैं पंजाब के किसानों के लिए पानी लाउंगा।

 - पीएम ने कहा किसानों को पानी दिलाने के लिए हमने समझौते पर टास्क फोर्स गठित की।

 - पीएम ने जवानों की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक का जिर्क किया।

 - कहा, जब हमारे बहादुर जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक किया तो पाक में हड़कंप मच गया।