इस तरह से पाकिस्तान को मिलने वाली पानी की कटौती करेगा भारत

नई दिल्ली (26 सितंबर): सिंधु जल संधि पर हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से इस बात पर राय मांगी कि किस तरह से पाकिस्तान को मिलने वाली पानी की कटौती की जा सके। इसके लिए अधिकारियों ने पीएम को कुछ राय दी, जिसपर उन्होंने तुरंत काम करने को कहा।

वाटर मिनिस्ट्री के अफसरों के मुताबिक, भारत सिंधु जल समझौते के तहत पश्चिमी नदियों के पानी से 18 हजार मेगावॉट बिजली बना सकता है।

- सिंधु जल संधि के तहत भारत पश्चिमी नदियों की 18000 मेगावॉट बिजली की क्षमता का इस्तेमाल करेगा। - तुलबुल नौवहन परियोजना के निर्माण की भारत समीक्षा करेगा। इस परियोजना पर 2007 से काम रुका हुआ है। - ट्रीटी के तहत 3.6 मिलियन एकड़ फ़ीट पानी रोक सकता है भारत। - इस से कश्मीर के 6 लाख एकड़ जमीन को खेती के लिए मिलेगा। - भारत सिंधू झेलम और चेनाब के पानी को अब कृषि के साथ पनबिजली परियोजनाओं और डैम बनाने के लिए इस्तेमाल करेगा।

क्या है सिंधु जल समझौता? - सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में हुआ। इस पर जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने दस्तखत किए थे। - समझौते के तहत छह नदियों- ब्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चेनाब और झेलम का पानी भारत और पाकिस्तान को मिलता है। पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि भारत उसे समझौते की शर्तों से कम पानी देता है। वो दो बार इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में शिकायत भी कर चुका है। - समझौते के मुताबिक, सतलज, व्यास और रावी का अधिकांश पानी भारत के हिस्से में रखा गया जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया।

समझौता कैंसल हुआ तो प्यासा रह जाएगा पाकिस्तान... - इस समझौते को भारत अगर रद्द कर देता है तो वहां का एक बड़ा हिस्सा प्यासा रह जाएगा। सिंधु और बाकी पांच नदियां पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से की प्यास बुझाती हैं। - पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने पिछले दिनों कहा था कि सिंधु के पानी के बगैर देश का एक हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा। - सिंधु, झेलम और चेनाब में वाटर बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पाकिस्तान में बिजली की वैसे ही भारी परेशानी है। अगर यह समझौता कैंसल हो गया तो पाकिस्तान में बिजली संकट खड़ा हो सकता है। इसके अलावा, इन तीनों नदियों से सिंचाई भी की जाती है।