सिंधु जल समझौता: सरकार ने लिया ये फैसला, अब तड़पेगा पाकिस्तान

नई दिल्ली (4 मार्च): भारत ने पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का पानी 36 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) स्टोरेज करने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। सरकार ने रावी, व्यास और सतलज नदियों के पानी के समुचित इस्तेमाल के मकसद से इनपर मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बीच एक अहम समझौता हुआ। इसके तहत महत्वाकांक्षी शाहपुर कांडी बांध परियोजना से जुड़ा काम दोबारा से शुरू करने पर रजामंदी बनी। 55.5 मीटर ऊंचा शाहपुर कांडी बांध पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित है। इसकी मदद से पंजाब में पांच हजार हेक्टेयर जबकि जम्मू-कश्मीर में 32,173 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा, 206 मेगावॉट बिजली भी पैदा की जा सकेगी।

इस प्रॉजेक्ट पर मई 1999 में काम शुरू हुआ था, लेकिन बाद में पंजाब और जम्मू-कश्मीर में विवाद के बाद 2014 में इससे जुड़ा काम रुक गया था। इस प्रॉजेक्ट को दोबारा शुरू करने से सिंधु जल समझौते यानी इंडस वॉटर ट्रीटी (IWT) के तहत मिलने वाले पानी के हिस्से के पूरे इस्तेमाल का मकसद पूरा किया जा सकेगा।

1960 में दोनों देशों के बीच हुए जल समझौते के मुताबिक, पूर्वी नदियों का पानी भारत को मिलता है। समझौते के मुताबिक, भारत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का पानी बहने देना होता है। हालांकि, भारत को इन पश्चिमी नदियों से 36 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी का स्टोरेज करने की इजाजत है, जिसका वह घरेलू मकसद से इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, भारत ने अभी तक पानी के स्टोरेज की कोई व्यवस्था नहीं बनाई है। इसके अलावा, उसने समझौते के तहत सिंचाई के लिए तयशुदा पूरे कोटे का भी इस्तेमाल नहीं किया।