इंदौर: हॉस्‍पिटल में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही, 11 लोगों ने गंवाई आंख की रोशनी

न्यूज़ 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(17 अगस्त): मध्‍य प्रदेश के इंदौर में अस्‍पताल की लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।  इंदौर आई अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने आए 11 मरीजों की आंख की रोशनी चली गई है। मामला सामने आने के बाद अस्‍पताल के लाइसेंस को रद्द कर दिया गया है। वहीं सरकार ने मामले के जांच के आदेश भी दे दिए हैं। न्‍यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए इंदौर आई अस्पताल में 8 अगस्त को 'राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम' के तहत एक शिविर लगाया गया था, जिसमें मरीजों के ऑपरेशन हुए। इसके बाद आंख में दवा डाली गई, जिससे उन्हें संक्रमण हुआ और धीरे-धीरे उनकी आंखों की रोशनी ठीक होने की बजाय चली गई। जांच के बाद डॉक्टरों ने भी माना कि मरीजों की आंखों में इंफेक्शन हो गया है, लेकिन इसका कारण नहीं बता सके। 

सभी मरीज 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उसी दिन इनके ऑपरेशन हुए। अगले दिन आंखों में दवाई डालने के बाद इंफेक्शन हुआ और मरीजों ने हंगामा शुरू किया। कई मरीज रोने लगे। डॉक्टरों ने चेक किया तो बोले- हमें सब कुछ सफेद दिख रहा। कुछ ने बताया कि उन्हें सिर्फ काली छाया दिखाई दे रही है। जांच के बाद डॉक्टरों ने माना कि इंफेक्शन हो गया है, लेकिन वे यह नहीं बता सके कि इसकी वजह क्या है। इधर, स्वास्थ्य विभाग ने घटना के बाद हॉस्पिटल का ओटी सील कर दिया है। यहां आंखों के ऑपरेशन पर पाबंदी लगा दी है। जांच के बाद कारण स्पष्ट होने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है। अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर महाशब्दे ने बताया कि संक्रमण का कारण अब तक पता नहीं चला है। अन्य विशेषज्ञ भी जांच कर चुके हैं। सैंपल भी जांच के लिए भिजवाए हैं। 

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल की ओटी को सील कर दिया है। इसके साथ ही राज्‍य सरकार ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं। इस मामले की जांच इंदौर कमिश्नर की अगुवाई में सात सदस्यीय कमेटी करेगी, जिसमें इंदौर कलेक्टर समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हैं। इस जांच रिपोर्ट को 72 घंटे के भीतर सब्‍मिट करना होगा। मध्‍य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही पीड़ित परिवार को 20 हजार रुपये की तत्काल मदद दी जाएगी। वहीं, पूरे मामले पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी संज्ञान लिया है। कमलनाथ ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने बताया कि पीड़ित मरीजों की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सभी मरीजों के उपचार का खर्च सरकार करेगी। इसके साथ ही प्रत्येक प्रभावित मरीज को 50-50 हजार की मदद दी जाएगी।  

इंदौर आई हॉस्पिटल में दिसंबर 2010 में भी मोतियाबिंद के ऑपरेशन फेल होने के बाद 18 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। इस पर तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. शरद पंडित ने संबंधित डॉक्टर व जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की। 24 जनवरी 2011 को अस्पताल को मोतियाबिंद ऑपरेशन व शिविर के लिए प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद शिविरों के लिए सीएमएचओ की मंजूरी अनिवार्य कर दी। कुछ महीने बाद अस्पताल पर पाबंदियां रहीं, फिर इन्हें शिथिल कर दिया। 2015 में बड़वानी में भी इसी तरह के मामले में 60 से ज्यादा लोगों की रोशनी चली गई थी।