'आतंकी चाहे जो हों, पाकिस्तान को कार्रवाई करनी ही होगी'

नई दिल्ली(27मई): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण संबंधों पर कहा है कि ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती। पाकिस्तान को खुद हुए आतंकवाद पर कठोर कदम उठाने होंगे। आतंकवादी चाहे वो स्टेट एक्टर्स हों या नॉन स्टेट एक्टर पाकिस्तान को उन पर सख्त रुख अपनाना होगा तभी भारत के साथ उसके संबंधों में नया आयाम आयेगा।

'वॉल स्ट्रीट जरनल'से साक्षात्कार में  नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-पाक संबंध वास्तव में बहुत ज्यादा ऊंचाइयों पर पहुंच सकते हैं, बशर्ते पाकिस्तान अपनी ही बनाई हुई आतंकवाद की बाधा को हटा दे, बेशक वह राज्य प्रायोजित हो या सरकार से इतर। नरेंद्र मोदी ने कहा हम पहला कदम उठाने के लिए तैयार हैं लेकिन शांति की राह अब एक दोतरफा रास्ता है। भारत में आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को सजा देने की दिशा में प्रभावी कदम उठा पाने की पाकिस्तान की विफलता हमारे संबंधों की प्रगति को सीमित करती है। हमने हमेशा यह कहा है कि एक-दूसरे से लड़ने के बजाय भारत और पाकिस्तान को मिलकर गरीबी के खिलाफ लड़ना चाहिए।

मोदी ने कहा कि एक शांतिपूर्ण एवं खुशहाल पड़ोस के उनकी सरकार के सक्रिय एजेंडे की शुरूआत उनकी सरकार के पहले दिन से हो गई थी। उन्होंने कहा कि मैं जो भविष्य भारत के लिए देख रहा  हूं, वैसे ही भविष्य का सपना मैं अपने पड़ोसियों के लिए भी देखता हूं। मेरी लाहौर यात्रा इसी विश्वास का संकेत थी। हिंद महासागर के तट पर बसे देशों के साथ भारत के शानदार संबंधों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा के साथ भारत-प्रशांत क्षेत्र में होने वाले बदलावों के प्रति भारत की एक स्वाभाविक रूचि है।

उन्होंने कहा,हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा भारत के हाथों में है। इसलिए हम इस क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को प्रभावित कर वाले किसी भी बदलाव को सावधानी के साथ देखते हैं। मोदी ने कहा कि पिछली सदी में जहां विश्व दो खेमों में बंटा हुआ था, अब ऐसा नहीं है। आज पूरा विश्व अंतरनिर्भर है। उन्होंने कहा, यदि आप चीन और अमेरिका के बीच के संबंध को भी देखेंगे तो पाएंगे कि ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां व्यापक मतभेद हैं लेकिन ऐसे भी क्षेत्र हैं, जहां वे मिलकर काम कर रहे हैं। यह एक नया तरीका है। उन्होंने कहा, यदि हम इस अंतरनिर्भर विश्व की सफलता सुनिश्चित करना चाहते हैं तो मुझे लगता है कि देश को सहयोग तो करना ही चाहिए, साथ ही साथ हमें अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।