1971 में भारत-पाक युद्ध के बाद मजबूत राजनेता बन कर उभरीं थीं इंदिरा गांधी

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (19 नवंबर): पाकिस्तान कुछ भी भूल जाये लेकिन इंदिरा गांधी को कभी नहीं भूलेगा। इंदिरा गांधी की सफल कूटनीति और विश्व के नेताओ पर उनके प्रभाव था कि भारत ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान को नये राष्ट्र बांग्लादेश में परिवर्तित करा दिया। इतना ही नहीं पाकिस्तान की दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ी हार हुई। भारत-पाक युद्ध शुरु होने के अगले दिन इंदिरा बेहद शांत थी। उनके डॉक्टर रहे केपी माथुर ने अपनी किताब में लिखा है कि जंग छिड़ने के अगले दिन सुबह जब मैं उनसे मिलने पहुंचा तो वो बेहद कूल थीं और अपने दीवान के बेडकवर बदल रही थीं।

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इंदिरा गांधी के साथ बिताए अपने कई सालों के रिश्तों पर  माथुर ने  लिखा है कि पाकिस्तान से वॉर शुरू होने का अगला दिन था। जब मैं उनसे मिलने सुबह पहुंचा तो वो बेहद शांत थी, वो कमरे की धूल साफ कर रहीं थी। माथुर लिखते हैं कि शायद इससे वो अपना तनाव कम रहीं थी।

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माथुर के मुताबिक पीएम बनने के शुरुआती सालों इंदिरा तनाव में रहती थीं। वो कभी-कभी कन्‍फ्यूज हो जाती थी। माथुर के मुताबिक पीएम बनने के शुरुआती दिनों में इंदिरा गांधी के पेट में दिक्‍कत होती थी जो शायद उनके नर्वस होने का नतीजा था। माथुर लिखते हैं कि इंदिरा एक खुशमिजाज, ख्‍याल रखने वालीं और मददगार महिला थीं।वो एक अच्छी मां, एक बेहद ही अच्छी दादी और एक अच्छी सास थी। माथुर के मुताबिक इंदिरा नौकरों से भी अच्‍छा बर्ताव करती थीं और हर नौकर को उसके नाम से पुकारती थीं। किताब के मुताबिक इंदिरा सादगी भरा जीवन जीने में विश्वास रखती थीं।  राजीव गांधी और सोनिया से शादी के बाद इंदिरा चाहती थीं कि सोनिया गांधी देश की सामाजिक और सांस्‍कृतिक जीवन में घुलमिल जाएं।