आबादी की रफ्तार में आई कमी, मुस्लिम निकले सबसे आगे

नई दिल्ली ( 12 जनवरी ): देश में बच्चे पैदा करने की दर में बड़ी कमी आई है और यह स्तर रिप्लेसमेंट लेवल से भी कम है। हिंदुओं और मुस्लिमों में भी फर्टिलिटी रेट गिरा है, लेकिन अब भी 'हम दो हमारे दो' के आंकड़े से यह अधिक है। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है साल 2015-16 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक हिंदुओं में बच्चे पैदा करने की दर 2.1 पर आ गई है, जबकि 2004-05 में यह आंकड़ा 2.8 का था। पिछले आंकड़े के लिहाज से देखें यह बड़ी गिरावट है।

मुस्लिमों में बच्चे पैदा करने की दर अब भी देश के अन्य समुदायों के मुकाबले अधिक है। मुस्लिम समाज में प्रति परिवार यह आंकड़ा 2.6 है। हालांकि 2004-05 के 3.4 के आंकड़े की तुलना में यह बड़ी गिरावट कही जा सकती है। 2015-16 में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे का धार्मिक आधार पर डेटा निकालने पर यह खुलासा हुआ है। देश में सबसे कम फर्टिलिटी रेट 1.2 जैन समाज का है। देश में शिक्षा के स्तर में भी जैन समाज के लोग सबसे आगे हैं। इसके बाद सिखों में बच्चे पैदा करने की दर 1.6, बौद्धों और नव-बौद्धों में 1.7 और ईसाइयों में 2 है। भारत के कुल फर्टिलिटी रेट की बात करें तो यह 2.2 है। 

'यदि आर्थिक आधार पर विश्लेषण किया जाए तो न्यूनतम आय वर्ग वाले परिवारों में बच्चों की दर सबसे अधिक 3.2 है, वहीं सबसे उच्च आय वर्ग लोगों में यह आंकड़ा सबसे कम 1.5 है।'