देश में आएगी सस्ते तेल की बहार, ये है बड़ी वजह

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 12 जुलाई ): अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका ने ट्रेड वॉर की इस तनातनी में और इजाफा करते हुए 200 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों के आयात पर 10 फीसद टैरिफ लगाने की घोषणा की है। जानकारी के लिए बता दें कि बीते वर्ष ट्रंप ने 34 अरब डॉलर के चीनी आयात पर 25 फीसद टैरिफ लगाया गया था। इसपर जवाबी पलटवार करते हुए चीन ने कहा है कि वह भी अमेरिका से आयात होने वाले सामान पर टैरिफ लगाएगा। 

वहीं ईरान पर प्रतिबंध लागू होने से पहले अमेरिका से भारत की कच्चे तेल की खरीद रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जून में अमेरिका से कच्चे तेल का आयात रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा बीते साल के मुकाबले लगभग दोगुने का है। एशियाई देशों ने तेल की आपूर्ति के लिए ईरान और वेनेजुएला की बजाय अमेरिका का रुख किया है, जो ट्रंप प्रशासन के लिए एक तरह से जीत की तरह है।  

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से ईरान से नवंबर तक किसी भी तरह के आयात को पूरी तरह खत्म करने को कहा है। ऐसे में भारत की ओर से उससे तेल की खरीद में इजाफा होना अमेरिका के लिए क्रूड के जरिए राजनीतिक हितों को साधने के प्रयास में सफलता की तरह है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर दिन 1.76 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात कर अमेरिका क्रूड के बड़े एक्सपोर्ट्स में से एक हो गया है। यह आंकड़ा अप्रैल महीने का है। 

आंकड़ों के मुताबिक जुलाई तक अमेरिका के प्रडयूर्स और ट्रेडर्स 15 मिलियन बैरल क्रूड ऑइल भारत भेजेंगे, जबकि 2017 में यह आंकड़ा महज 8 मिलियन बैरल ही था। यदि अमेरिका से आने वाले सामान पर चीन ने टैरिफ में इजाफा किया तो फिर भारत की ओर से अमेरिकी कच्चे तेल का आयात बढ़ सकता है। चीन के टैरिफ के चलते भारत को फायदा होगा क्योंकि अमेरिका को कीमतें घटानी पड़ सकती हैं।इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन में फाइनैंस हेड ए.के. शर्मा ने कहा, 'अमेरिकी क्रूड की मांग में इसलिए इजाफा हुआ है क्योंकि उसकी कीमत कम है। यदि चीन की ओर से अमेरिकी तेल के आयात में कमी की जाती है तो यह गिरावट और बढ़ सकती है। ऐसा होता है तो भारत की ओर से क्रूड के इंपोर्ट में और इजाफा होगा।'