150 साल बाद एक्टिव हुआ भारत का इकलौता लाइव वॉल्कैनो

नई दिल्ली(19 फरवरी): अंडमान-निकोबार आईलैंड्स में मौजूद भारत का इकलौता लाइव वॉल्कैनो फिर से एक्टिव हो गया है। यह 150 से ज्यादा सालों से शांत था। इसकी रिसर्च में लगे साइंटिस्ट ने बताया है कि इस वॉल्कैनो में दिन के वक्त राख उठती है तो सूरज डूबने के बाद लाल रंग का लावा निकलता है।

- यह जानकारी गोवा में मौजूद काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशिनोग्राफी (सीएसआईआर-एनआईओ) के रिसर्चर्स ने शुक्रवार को दी।

- बैरन आईलैंड पर मौजूद यह वाॅल्कैनो पोर्ट ब्लेयर से 140 किलोमीटर की दूरी पर है।

- अभय मुधोलकर की अगुआई वाली साइंटिस्ट्स की टीम ने बताया कि यह वॉल्कैनो 150 साल से ज्यादा वक्त से शांत था।

- इसमें 1991 में हलचल शुरू हुई थी, जो बीच-बीच में नजर आती रही, लेकिन अब यह एक्टिव हो गया है।

- सीएसआईआर-एनआईओ की टीम के मुताबिक, उन्हें वॉल्कैनो के एक्टिव होने की पहली बार जानकारी 23 जनवरी 2017 से इसमें अचानक राख निकलना शुरू हुई थी।

- तभी से सीएसआईआर-एनआईओ का शिप आरवी सिंधु संकल्प बैरन वॉल्कैनो के करीब अंडमान बेसिन से सैम्पल जुटा रहा है।

- रिसर्चर्स की टीम 26 जनवरी को फिर वॉल्कैनो के पास गई। तब भी इसमें धमाके सुनाई दे रहे थे और धुआं निकल रहा था।

- टीम वॉल्कैनो से एक मील की दूरी पर है और इस पर करीब से नजर बनाए हुए है।

- सीएसआईआर-एनआईओ की टीम ने बताया कि इस वॉल्कैनों में दिन के वक्त सिर्फ राख का गुबार नजर आता है, वहीं सूरज डूबने के बाद इसमें से लावा निकलता देखा जा सकता था।

- टीम ने लावा से बने पत्थरों की जांच भी शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में भी पता चला है कि वॉल्कैनो एक्टिव हो गया है।

- रिसर्चर्स ने वॉलकैनो के पास से कुछ काले पत्थर भी जमा किए हैं, जो कोयले की तरह नजर आते हैं। ये पत्थर लावा के सूखने के बाद अपने आप तैयार होते हैं।