इन 4 महत्वपूर्ण विदेशी बंदरगाहों तक पहुंचा भारत, बढ़ेगी नौसेना की ताकत

नई दिल्ली ( 1 जून ):  भारत और इंडोनेशिया ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाते हुए और 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जको विडोडो के बीच हुई बातचीत के बाद यह समझौते हुए। दोनों नेताओं ने मैरीन, इकॉनमी और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा की और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर भी बात हुई।इंडोनेशिया ने भारत को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अपने सबांग बंदरगाह के सैन्य और आर्थिक इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। रणनीतिक तौर पर इसे पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा की सबसे अहम सफलताओं में से एक माना जा रहा है। इसकी मदद से पड़ोस में भारतीय नौसेना की ताकत में और भी इजाफा हुआ है।अब 4 महत्वपूर्ण विदेशी बंदरगाहों तक भारत की पहुंच सुनिश्चित हो गई है।-मलक्का जलसंधि के ठीक मुहाने पर मौजूद इंडोनेशिया के संबाग बंदरगाह को काफी अहम माना जाता है। मलक्का जलसंधि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच की सबसे अहम शिपिंग लेन और सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग है। सबमरीन के लिए भी पर्याप्त सक्षम इस बंदरगाह तक भारत की पहुंच होने से इस इलाके में चीन के बढ़ते वर्चस्व को काउंटर किया जा सकेगा।-भारत को इस साल ओमान के दक्षिणी तट पर स्थित दुकम बंदरगाह पर मिलिटरी पहुंच हासिल हुई है। हिंद महासागर के उत्तर पश्चिमी एज पर स्थित दुकम बंदरगाह लाल सागर तक आसान पहुंच उपलब्ध कराएगा।-इरान का चाबहार बंदरगाह यह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के करीब है जहां चीन ने काफी निवेश कर रखा है। यह बंदरगाह नॉर्थ-साउथ ट्रांसपॉर्ट कॉरिडोर में भी आता है जो भारत को सेंट्रल एशिया और यूरोप से जोड़ता है।-असम्पशन आइलैंड सेशल्स कागज पर यह पूरी तरह से एक इन्फ्रास्ट्रक्चरल प्रॉजेक्ट है। सेशल्स में राजनीतिक विपक्ष की वजह से इस अग्रीमेंट को रिवाइज करना पड़ा, लेकिन मुख्य रूप से यह भारत के रणनीतिक हितों की दिशा में ही आगे बढ़ा हुआ एक कदम है।