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देश में मासिक डेटा की खपत 15 गुना तक बढ़ी

देश में इंटरनेट रोज नए-नए आयाम गढ़ रहा है इस बात को नकारा नहीं जा सकता। ट्राई द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के मुताबिक 2014 से लेकर तीन वर्षों में, देश में मासिक डेटा की खपत 15 गुना बढ़ तक बढ गई है। क्योंकि स्मार्टफोन और मोबाइल इंटरनेट सस्ता और तेज हो गया।

नई दिल्ली (3 जून): देश में इंटरनेट रोज नए-नए आयाम गढ़ रहा है इस बात को नकारा नहीं जा सकता। ट्राई द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के मुताबिक 2014 से लेकर तीन वर्षों में, देश में मासिक डेटा की खपत 15 गुना बढ़ तक बढ गई है। क्योंकि स्मार्टफोन और मोबाइल इंटरनेट सस्ता और तेज हो गया।2014 के अंत में, औसत मासिक डेटा खपत प्रति व्यक्ति केवल 0.26 जीबी थी, जो 2017 के अंत में 4 जीबी से अधिक हो गई। इंटरनेट की ज्यादा खपत सिर्फ इस वजह से नहीं हो रही है की डाटा सस्ता हो गया है। इसकी एक वजह ये भी कि आज के दौर में लोग आॅनलाइन वीडियो देखने से लेकर इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं।मीडिया एनालिटिक्स कंपनी कॉमस्कोर के मुताबिक 89% भारतीय मोबाइल और टेबलेट के जरिए आॅनलाइन आते हैं जिसकी वजह से ज्यादा मात्रा में डाटा की खपत हो रही है। 4 जी, जो कम से कम 10 एमबीपीएस की गति का वादा करता है, वायरलेस डेटा खपत का मुख्य वजह है, जो पिछले साल कुल उपयोग का लगभग 82% था।आपको बता दें कि 2014 में 4 जी डेटा की कीमत 269 रुपये प्रति जीबी के औसत से गिरकर 19 रुपये हो गई है। रिलायंस जियो के बाद कीमतें तेजी से गिरावट आईं, जिसमें सितंबर 2016 में लॉन्च किया गया एक 4 जी-बिजनेस मॉडल है। हालांकि, बढ़ते इंटरनेट उपयोग के साथ, एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेल्युलर और बीएसएनएल जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियां भी अपने 4 जी नेटवर्क का विस्तार कर चुकी हैं।यूट्यूब, गाना और हॉटस्टार जैसी स्ट्रीमिंग सेवाओं के लिए वायरलेस डेटा खपत बढ़ाना एक वरदान रहा है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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