देश की नज़र योगेश्वर पर, मां बोलीं- बेटा ज़रूर लाएगा 'सोना'

नई दिल्ली(21 अगस्त): हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव भैंसवाल कलां की भूमि पर जन्मा मनीष आज देश के लिए योगी बन गया है। मां सुशीला देवी का कहना है कि अब योगी उसका ही नहीं, बल्कि पूरे देश का बेटा है और उसे अपने बेटे पर पूर्ण विश्वास है वह इस बार देश की झोली में स्वर्ण पदक अवश्य डालेगा।

- सुशीला देवी ने बताया कि योगेश्वर को वह शिक्षक बनाना चाहती थीं, क्योंकि उसके दादा रतिराम एक गांव के स्कूल में पढ़ाते थे। पिता राममेहर ने भी स्कूल में पढ़ाया।  - मां सुशीला ने बताया कि घरवालों ने उसका नाम मनीष रखा था, लेकिन सब प्यार से योगी बोलने लगे और वही नाम आज योगेश्वर हो गया। उसे अपने बेटे योगी के हौंसले को कभी टूटने नहीं दिया और हर वक्त उसके हौंसलें को बढ़ाती रही।

- मां सुशीला देवी ने कहा कि उसे अच्छी तरह से याद है जब 8 साल की उम्र में ही योगेश्वर के दिमाग में भैंसवाल कलां के बलराज पहलवान प्रेरणा बन गए। यहां से ही उसके बेटे योगी को पहलवान बनने का जोश दिलो-दिमाग में चढ़ गया। ऐसे में योगी बचपन से ही अखाड़े में जाने लगा। मैं नहीं चाहती थी कि उनका बड़ा बेटा अखाड़े में जाकर अपने समय को बर्बाद करे। बचपन में अखाड़े में उनका प्रशिक्षण स्वर्गीय सतबीर सिंह ने देना शुरु कर दिया। 

- सुशीला देवी ने बताया कि उसके बेटा योगी 1992 में जब वह पांचवीं में था, तब एक दिन वह घर पर दीवार घड़ी लेकर आया। तब उसे घर वालों ने पूछा तो बोला स्कूल में कुश्ती प्रतियोगिता थी, जिससे जीत कर उसने दीवार घड़ी मिली है। बस उस दिन योगी के पिता राममेहर का मन बदल गया। वह बेटे को पहलवानी के लिए प्रोत्साहित करने लगे। उसके खाने का ख्याल रखते। खुद सुबह उसे बादाम पीसकर देते। वह उसे हमेशा जीतकर आने के लिए प्रेरित करते थे। दुखों में भी नहीं टूटा योगी का हौंसला