विप्रो पर लंदन में किया 'लैंगिक भेदभाव' का मुकदमा भारतीय महिला ने जीता

नई दिल्ली (5 मई): एक भारतीय महिला ने दावा किया है कि उसने एक ब्रिटिश ट्राइब्यूनल में विप्रो के खिलाफ एक मुकदमा जीत लिया है। यह मुकदमा लंदन के दफ्तर में काम करने के दौरान "लैंगिक भेदभाव, असमान तनख्वाह और अत्याचार" के आधार पर उसे निकाल देने को लेकर कंपनी पर किया था।

'द फाइनेंशियल एक्सप्रेस' के मुताबिक, 40 वर्षीय श्रेया उकिल लंदन स्थित विप्रो के ऑफिस में काम करती थी। बुधवार को उकिल के वकील स्लेटर गॉर्डन ने एक बयान में कहा, "विप्रो लीडरशिप टीम, जिसमें उस समय के चीफ एक्जीक्यूटिव टीके कुरियन भी शामिल हैं। उन्होंने उकिल को उसके ब्रिटेन में रोल और नौकरी से बाहर निकालने के लिए षडयंत्र रचा।"

कोर्ट ने गौर किया कि उकिल को निकालने का निर्देश सबसे ऊपर से आया। इसे उसी पैमाने पर महत्व दिया गया। बयान में कहा गया, "उकिल को लैंगिक भेदभाव, असमान तनख्वाह और सेक्सिज़्म के खिलाफ बोलने पर विप्रो के नेतृत्व ने परेशान किया।"

उकिल ने विप्रो के साथ करीब 10 साल तक काम किया। उसने कंपनी के लिए कई मिलियन डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट्स भी हासिल किए। इसके अलावा कई परफॉर्मेस अवार्ड्स भी जीते। उसने 2012 में इसपर चिंता जताना शुरू किया था। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।

उकिल ने बैंगलुरु की आउटसोर्सिंग फर्म पर इन आरोपों में अक्टूबर 2015 में मुकदमा किया था। जिसमें उसने हर्जाने मं 1 मिलियन पाउंड्स (9.63 करोड़ रुपए) की मांग की। 

उकिल और उसके 54 वर्षीय सीनियर मनोज पुंजा को निकालने के बाद कंपनी ने तब कहा था कि उन्हें एक आंतरिक जांच के बाद सर्विस से रिलीव कर दिया गया। जांच में यह कहा गया कि वे दोनों ही रिलेशनशिप में थे। लेकिन इसके बारे में उन्होंने कम्पनी को रिपोर्ट नहीं किया। जबकि ऐसा करना कम्पनी की पॉलिसी के तहत जरूरी है।

उकिल विप्रो के लंदन स्थित बैक ऑफिस ऑपरेशन्स में उस वक्त सेल्स एंड मार्केट डेवलेपमेंट मैनेजर थी। उकिल ने सेंट्रल लंदन इन्प्लॉयमेंट ट्राइब्यूनल में मुकदमा दायर किया। उसने दावा किया कि उसे जबरन पुंजा के साथ अफेयर के लिए मजबूर किया गया। पुंजा शादीशुदा हैं और उस समय बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) ऑफिस में हेड थे।