इन मंदिरों में वर्जित है पुरुषों का प्रवेश

नई दिल्ली(30 जुलाई): मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर पाबंदियां तो अक्सर ही देखने को मिल जाती हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि देश में ऐसे कई मंदिर हैं जहां पुरुषों को प्रवेश की इजाजत नहीं है?

आज हम आपको ऐसे ही मंदिरों के बारे में बताते हैं....

- ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

- अजमेर से 15 किमी. दूर जगद्पिता ब्रह्मा का मंदिर भी उन्हीं में से एक है। यहां गर्भगृह में विवाहित पुरुष श्रद्धालुओं का जाना वर्जित है। दरअसल एक मान्यता के अनुसार देवी सरस्वती के शाप के कारण विवाहित पुरुषों को भीतर जाने से रोका जाता है। माना जाता है कि जो भी विवाहित पुरुष गर्भगृह में ब्रह्मा के दर्शन के लिए जाता है उसके वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है।

- अट्टूकल मंदिर, तिरुवनंतपुरम मशहूर पद्मनाभ स्वामी मंदिर से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवी पार्वती के इस मंदिर में हर साल करीब 30 लाख महिलाएं दर्शन के लिए आती हैं। इसे 'नारी सबरीमला' के नाम से भी जाना जाता है। इसमें भी पुरुषों का प्रवेश वर्जित है।

- देवी कन्याकुमारी, तमिलनाडु

 

देवी भगवती के किशोर स्वरूप को समर्पित यह मंदिर देश के दक्षिणतम छोर पर स्थित है। यह शक्तिपीठों में से एक है। देवी भगवती के इस स्वरूप को संन्यास की देवी के रूप में भी जाना जाता है। यही कारण है कि इस मंदिर के गर्भगृह में विवाहित पुरुषों का प्रवेश सख्त वर्जित है।

 

-चक्कूलातुकावु मंदिर, अलापुझा

केरल के अलापुझा जिले में स्थित इस मंदिर में हर साल पोंगल का खास त्योहार मनाया जाता है, जिसमें लाखों महिला श्रद्धालु हिस्सा लेती हैं। यह कार्यक्रम करीब एक हफ्ते तक चलता है, जिसे नारी पूजा के नाम से भी जानते हैं। इस दौरान यहां पुरुषों का प्रवेश विशेष तौर पर वर्जित होता है।

माता मंदिर, मुजफ्फरपुर

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित यह मंदिर वैसे तो साल भर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है, लेकिन एक अवधि ऐसी आती है जिस दौरान पुरुषों का प्रवेश सख्त वर्जित कर दिया जाता है। यहां तक कि इसके मुख्य पुजारी को भी इस दौरान गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होती है। अप्रैल 2016 तक इस मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं का प्रवेश वर्जित था और केवल पुरुष ही शिवलिंग के दर्शन कर सकते थे। लेकिन सामाजिक संगठन भूमाता रंणरागिनी ब्रिगेड के प्रयासों के चलते बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद इसमें पुरुषों के प्रवेश को भी वर्जित कर दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि परंपरा भी न टूटे और समस्या का समाधान भी हो जाए।