रेवले इस तरह टिकट के लिए वसूलता है हवाई जहाज से भी ज्यादा किराया

नई दिल्ली (5 मई): रेलवे के मुसाफिरों को कंफर्म टिकट के वादे के साथ शुरु हुई थी ट्रेनों में प्रीमियम तत्काल की व्यवस्था। तत्काल टिकट में मुश्किल ये हो रही थी कि बुकिंग शुरु होते ही टिकटें धड़ाधड़ बुक हो जा रही थी। शातिर एजेंटों ने टिकट खिड़की से लेकर ऑनलाइन बुकिंग का भी तोड़ निकाल लिया था। प्रीमियम तत्काल में थोड़े ज्यादा पैसे लेकर कंफर्म टिकट का वादा किया था रेलवे ने। अब पता चल रहा है मुसाफिर पहले की तरह परेशान है सिर्फ रेलवे की कमाई बढ़ गई है।

आपको पता भी नहीं चलता और रेलवे आपकी जेब पर डाका डाल जाती है। प्रीमियम तत्काल के नाम पर रेलवे भरपूर कमाई करने में लगी है। हालात ये है कि कई बार ट्रेन के प्रीमियम तत्काल टिकट का किराया हवाई जहाज के टिकट से महंगा पड़ता है। प्रीमियम तत्काल के नाम पर रेलवे ने जो सेवा शुरु की हैं उसने पब्लिक की ट्रेन को पैसे वालों की ट्रेन में बदल दिया है। यानि पैसा फेंकिए और ट्रेन में सफर कीजिए।

रेलवे का पीक सीजन चल रहा है। गर्मी की छुट्टियां शुरु होने वाली है और इस सीजन में ट्रेनों के टिकट मिलना आसान नहीं होता। पहले मुसाफिरों की इस मजबूरी का फायदा एजेंट्स उठाते थे अब रेलवे ने खुद इसका ठेका ले लिया है। प्रीमियम तत्काल के नाम पर नॉर्मल किराए से तीन से पांच गुना ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। जिसका नतीजा होता है कि कई बार प्रीमियम तत्काल के टिकट लेकर यात्रा करने से ज्यादा सस्ता होता है हवाई यात्रा करना।

इसको कुछ यूं समझिए कि अगर स्लीपर क्लास का नॉर्मल किराया 265 रुपए है तो प्रीमियम तत्काल में किराया पांच गुना तक बढ़कर 1 हजार रुपए तक पहुंच जाता है। 2nd एसी का प्रीमियम तत्काल किराया कई बार हवाई जहाज के टिकट से भी महंगा होता है।

इसे ज्यादा आसानी से समझने के लिए मान लीजिए कि आपको इंदौर से मुंबई के सफर पर निकलना है। इस सफर के लिए शाम चार बजे की ट्रेन है इंदौर मुंबई सेंट्रल  अवंतिका एक्सप्रेस। इस ट्रेन के 3rd एसी का तत्काल प्रीमियम किराया है 3,985 रुपए। 2nd एसी का तत्काल प्रीमियम किराया बढ़कर 4,535 रुपए हो जाता है। जबकि इंदौर से मुंबई की हवाई यात्रा का किराया है करीब 4 हजार रुपए। यानि ट्रेन यात्रा हवाई जहाज से भी महंगी है। जबकि ट्रेन से इस सफर में 14 घंटे का वक्त लगता है। हवाई जहाज से ये दूरी सिर्फ डेढ़ घंटे में तय की जा सकती है।

ये किसी एक रुट की बात नहीं है। ट्रेन के तकरीबन हर रुट में तत्काल प्रीमियम से टिकटें मिल रही हैं । और हर रुट में प्रीमियम तत्काल के लिए ऐसी ही व्यवस्था है। ट्रेनों की तत्काल टिकटें यात्रा और दूरी के हिसाब से मिलती हैं जबकि प्रीमियम तत्काल टिकटें ट्रेनों में उपलब्ध सीटों के आधार पर मिलती हैं। प्रीमियम तत्काल कोटे में जैसे जैसे सीटें कम होती जाती हैं टिकट का किराया बढ़ता जाता है। 

समझिए कि प्रीमियत तत्काल कैसे बढ़ा रहा है यात्रियों पर बोझ... जिन ट्रेनों में प्रीमियम तत्काल का कोटा होता है, उनमें तत्काल कोटे से 50 फीसदी सीटें नॉर्मल तत्काल से बुक होती है। जबकी बाकी की 50 फीसदी सीटें प्रीमियम तत्काल से बुक होती है। प्रीमियम तत्काल में हर 10 प्रतिशत सीटें बुक होने के बाद किराया 20 प्रतिशत बढ़ जाता है। यानि अगर प्रीमियम तत्काल कोटे में 50 सीटें हैं तो हर 5 टिकट बुक होते ही किराया बढ़ता जाएगा।

रेलवे डायनॉमिक प्राइसिंग पॉलिसी के तहत ऐसी टिकटों की बुकिंग करती है। ऐसी टिकटें सिर्फ ऑनलाइन बुक की जा सकती हैं। और इसके कैंसिल होने पर कोई पैसा भी नहीं मिलता है। 2014 में टिकटों की मारामारी से बचने के लिए प्रीमियम तत्काल सेवा शुरु हुई थी अब पता चल रहा है कि यात्री पहले की तरह परेशान हैं अंतर बस इतना आया है कि रेलवे की कमाई बढ़ गई है।