जानें क्यों अलग से पेश किया जाता था रेल बजट...

नई दिल्ली (21 सितंबर): कैबिनेट ने आज रेल बजट को आम बजट में मिला दिया है। इसी के साथ अब अलग से रेल बजट पेश नहीं होगा। सरकार ने 92 साल से चली आ रही इस परंपरा का अंत किया।

जाने कैसे बना अलग रेल बजट का चलन...

- 1921 में ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ ने पूरे रेलवे के लिए एक बेहतर मैनेजमेंट के लिए कमेटी बनाई।- 1924 में रेलवे पर बनी एक ब्रिटिश कमेटी ने रेल बजट को आम बजट से अलग करने की सिफारिश की थी।- ब्रिटिश भारत में अलग से रेल बजट इसलिए ज़रूरी था, क्योंकि आम बजट का 70% हिस्सा रेल बजट ही होता था।- आज की स्थिति ये है कि रेल बजट देश के आम बजट का सिर्फ़ 4 फीसदी है।- जब रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया था, उस समय रेलवे का प्रयोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 75 फीसदी और माल ढुलाई में 90 फीसदी तक होता था।- 1951 में सार्वजनिक परिवहन में रेलवे का हिस्सा 75% था जो अब घटकर सिर्फ़ 20% ही रह गया है।- देश के संविधान में अलग रेल बजट का कोई उल्लेख नहीं है, यानी एक तरह से हम ब्रिटिश राज की परंपराओं को ही आगे बढ़ाते रहे हैं।- अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और रूस में अलग से रेल बजट पेश करने की परंपरा नहीं है।

ऐसे कमाई करता है रेलवे...-  वर्ष 2016-17 के अनुमान के मुताबिक, रेलवे की आमदनी के 100 रुपये में से 63 रुपये 80 पैसे माल भाड़े से आते हैं।- यात्री किराए से 27 रुपये 60 पैसे आते हैं और अन्य स्रोतों से 8 रुपये 60 पैसे आते हैं।- 100 रुपये की कमाई में रेलवे के 33 रुपये कर्मचारियों के वेतन पर ख़र्च हो जाते हैं। 21 रुपये फ्यूल यानी बिजली और डीज़ल पर ख़र्च हो जाते हैं।- 18 रुपये पेंशन पर ख़र्च हो जाते हैं। 20 रुपये रेलवे फंड, स्टोर और लीज़ चार्ज जैसे ख़र्च में चले जाते हैं और सिर्फ़ 8 रुपये की बचत हो पाती है।- 2015-16 में रेलवे का Operating Ratio 90% रहा है यानी रेलवे को 100 रुपये कमाने में 90 रुपये ख़र्च करने पड़े और बचे सिर्फ़ 10 रुपये।

जानिए भारतीय रेल के कुछ रोचक तथ्य...- भारतीय रेलवे 65,436 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग के साथ दुनिया का चौथा सबसे विशाल रेल यातायात नेटवर्क संचालित करने वाला उपक्रम है।- यह अमेरिका, रूस, चीन के बाद दुनिया के सबसे लंबी रेल नेटवर्क संचालित करने वाले उपक्रमों से एक है।- यह एक अरब टन प्रतिवर्ष माल ढोने वाले रेल यातायात क्लब में शामिल हो गया है।- भारतीय रेलवे प्रतिदिन 20,038 ट्रेनों का संचालन करता है। इनमें से 12,617 ट्रेनें यात्री ट्रेनें हैं तथा 7,421 ट्रेनें माल ढोने के लिए हैं।- भारतीय रेलवे के अंतर्गत 7,172 स्टेशन हैं।